नई दिल्ली: दुनिया भर में मक्का के बाद गेहूं दूसरी सबसे महत्वपूर्ण अनाज फसल है। भारत में भी गेहूं का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इसे खेती की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान अगर गेहूं के बुवाई के समय ही सही बीज और उपचार की योजना बना लें, तो फसल को रोगों और कीटों से बड़ी हद तक बचाया जा सकता है। बीज का सही चुनाव और बुवाई से पहले बीज उपचार (Seed Treatment) जैसे शुरुआती कदम फसल को लूज स्मट, पीला रतुआ और दीमक जैसे खतरों से बचाकर बंपर पैदावार सुनिश्चित करते हैं।
लूज स्मट: बीज उपचार से मिलती है शुरुआती सुरक्षा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गेहूं में लूज स्मट (Loose Smut) का प्रकोप कई राज्यों में तेजी से बढ़ा है। यह एक खतरनाक बीजजनित रोग है, जिसमें बीमारी के रोगाणु बीज के अंदर छिपे रहते हैं। फसल के बढ़ते समय बालियाँ दाने देने के बजाय काले चूर्ण से भर जाती हैं, जिससे पूरी उपज प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रोग से बचाव का सबसे असरदार तरीका बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवा से बीज उपचार करना है। इससे रोग की शुरुआती अवस्था में ही वृद्धि रुक जाती है और फसल स्वस्थ बनी रहती है।
पीला रतुआ: बदलते मौसम के साथ बढ़ रहा खतरा
खेती वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समय गेहूं की सबसे बड़ी चुनौती पीला रतुआ (Yellow Rust) है, जो मौसम बदलते ही तेजी से फैलता है और फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसके लक्षण पहचानना आसान है पत्तों पर पीले रंग की धारियाँ और उन्हें छूने पर हल्दी जैसे पाउडर का लगना। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान बुवाई के दौरान ही रोग-रोधी किस्मों (Disease Resistant Varieties) का चुनाव करें। यदि खेत में रतुआ दिखे, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से टिल्ट (Tilt) या प्रोपिगार्ड (Propiguard) जैसी दवाओं का तुरंत उपयोग करना चाहिए, ताकि रोग फैलने से रोका जा सके।
दीमक और तेला: कीट प्रबंधन के लिए जरूरी कदम
रोगों के साथ-साथ कीट भी गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। बुवाई के शुरुआती चरण में दीमक (Termite) पौधों की जड़ों को खाकर फसल को खराब कर सकती है। इससे बचाव के लिए बीज उपचार के दौरान ही कीटनाशक का प्रयोग करना आवश्यक है। वहीं तापमान बढ़ने के साथ तेला या माहू (Aphid) का प्रकोप भी तेजी से बढ़ता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में एकतारा (Ektara) जैसी दवा का सही समय पर उपयोग फसल को सुरक्षित रखता है।
समय पर सिंचाई: दाना बनने के समय नमी बनाए रखना जरूरी
विशेषज्ञों ने किसानों को याद दिलाया है कि दाना बनने और बालियों में दूध भरने का चरण गेहूं की बढ़वार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान खेत में नमी की कमी होने से उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेत की स्थिति को देखते हुए समय पर सिंचाई अवश्य करें और नमी बनाए रखें।
सही प्रबंधन से मिल सकती है बंपर उपज
खेती विशेषज्ञों का कहना है कि बीज उपचार, रोग प्रबंधन, कीट नियंत्रण और समय पर सिंचाई ये चार कदम मिलकर गेहूं की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। यदि किसान बुवाई के समय ही इन बातों पर ध्यान दें, तो रोग और कीटों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और फसल से अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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