नई दिल्ली: खाद की कमी से जूझ रहे भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पिछले कई वर्षों से यूरिया की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच चली आ रही मुश्किलें अब समाप्त होने की दिशा में हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान यह ऐतिहासिक घोषणा हुई। जी हाँ, भारत-रूस यूरिया डील पर मुहर लग गई है। दोनों देश मिलकर एक बड़ा यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करेंगे। इसके लिए भारतीय कंपनियों और रूस की शीर्ष पोटाश एवं अमोनियम नाइट्रेट निर्माता कंपनी Uralchem Group के बीच एक अहम डील पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह परियोजना न सिर्फ भारत की खाद आपूर्ति को स्थिर बनाएगी, बल्कि लंबे समय से चली आ रही यूरिया संकट को भी खत्म करेगी।
डील का उद्देश्य: रूस के संसाधनों और भारत की जरूरतों का मेल
यह प्रस्तावित प्रोजेक्ट राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF), नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) और इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य रूस के विशाल प्राकृतिक गैस और अमोनिया रिजर्व का उपयोग करके बड़े पैमाने पर यूरिया उत्पादन करना है। ये दोनों ही यूरिया तैयार करने के मुख्य फीडस्टॉक हैं, जिन पर भारत की निर्भरता बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के साथ हुआ यह समझौता भारत के लिए सामरिक दृष्टि से किसी भी सैन्य गठबंधन जितना प्रभावशाली कदम है। बीते 6-7 वर्षों में यूरिया की कमी और सप्लाई बाधाओं ने किसानों को बेहद मुश्किल में डाला है। ऐसे में यह डील खाद सुरक्षा के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकती है।
20 लाख टन सालाना उत्पादन, लागत और लॉजिस्टिक्स पर फोकस
इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में जुड़े एक विशेषज्ञ ने बताया कि रूस में प्रस्तावित इस फैसिलिटी से हर वर्ष 20 लाख टन से अधिक यूरिया उत्पादन की उम्मीद है। फिलहाल जमीन आवंटन, प्राकृतिक गैस व अमोनिया के दाम और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बातचीत जारी है।
बीते दो वर्षों में वैश्विक बाजार में उथल-पुथल, युद्धों और पाबंदियों ने उर्वरक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे हालात में भारत के लिए सप्लाई सोर्स को विविध और स्थिर बनाना अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
आयात पर निर्भरता में आएगी भारी कमी
भारत हर साल भारी मात्रा में यूरिया आयात करता है। 2024-25 में भारत ने 5.6 मिलियन मीट्रिक टन यूरिया इंपोर्ट किया, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा 9.8 मिलियन टन तक पहुंच गया था। हालांकि घरेलू क्षमता में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन भारत आज भी ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों पर काफी निर्भर है।
अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान भारत ने 5.9 मिलियन टन कृषि-ग्रेड यूरिया इंपोर्ट किया, जो पिछले वर्ष के 2.5 मिलियन टन से दोगुने से भी अधिक है।
भारत की 40% आबादी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है और देश की GDP में कृषि का योगदान लगभग 15% है। ऐसे में उर्वरकों की निर्बाध सप्लाई देश की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत-रूस करार के गहरे मायने
रूस के विशाल गैस और अमोनिया भंडार उसे भारत का नैचुरल पार्टनर बनाते हैं। भारत दुनिया का बड़ा उर्वरक उपभोक्ता देश है, लेकिन फीडस्टॉक की कमी के कारण आयात पर निर्भर रहता है। रूस में यूरिया प्लांट लगाने से भारत फीडस्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई संकट से काफी हद तक सुरक्षित रहेगा।
2021 से 2024 के बीच भारत का रूस से फर्टिलाइज़र आयात तीन गुना बढ़कर 1.7 बिलियन डॉलर हो गया है, जो 2022 में 2.7 बिलियन डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। अप्रैल-अक्टूबर 2025 में कुल फर्टिलाइज़र इंपोर्ट 82% बढ़कर 10.2 बिलियन डॉलर हो गया।
रूस में बनने वाला नया प्लांट प्राकृतिक गैस आधारित होगा और ओमान में भारत के पुराने जॉइंट फर्टिलाइज़र वेंचर की तरह ही मॉडल पर काम करेगा। पुतिन के दौरे के दौरान साइन की गई यह डील पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाएगी।
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