नई दिल्ली: देश के अधिकांश हिस्सों में अगेती किस्मों की गेहूं बुवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन कई क्षेत्रों में पछेती गेहूं की बुवाई अभी बाकी है। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा दिल्ली ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। पूसा ने स्पष्ट कहा है कि जिन किसानों ने अभी तक गेहूं की बुवाई नहीं की है, वे मौसम की स्थिति को देखते हुए कुछ विशेष पछेती किस्मों की खेती करें। इसके साथ ही रबी फसलों की सिंचाई, रोग प्रबंधन और उर्वरक उपयोग को लेकर भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। पूसा ने सलाह दी है कि अगले पांच दिनों में किसान सिंचाई अवश्य कर लें, क्योंकि मौसम शुष्क रहने की संभावना है। जिन खेतों में गेहूं की फसल 21-25 दिन की हो चुकी है, वे पहली सिंचाई करें और सिंचाई के 3-4 दिन बाद उर्वरक की दूसरी मात्रा डालें।
पछेती गेहूं की इन किस्मों की करें बुवाई
पूसा के अनुसार, जिन क्षेत्रों में तापमान कम हो रहा है, वहां किसान जल्द से जल्द पछेती गेहूं की बुवाई करें। बीज दर 125 किग्रा प्रति हेक्टेयर रखनी चाहिए। बुवाई के लिए जिन किस्मों को सबसे उपयुक्त बताया गया है, वे हैं HD 3059, HD 3237, HD 3271, HD 3369, HD 3117, WR 544 और PBW 373। बुवाई से पहले बीजों को बाविस्टिन @ 1.0 ग्राम या थायरम @ 2.0 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करें। जिन खेतों में दीमक का प्रकोप होता है, वहां किसान क्लोरपायरीफास (20 EC) @ 5.0 लीटर प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें।
रबी फसलों के लिए जरूरी सावधानियाँ
पूसा ने किसानों को रबी सीजन की अन्य फसलों में भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। देर से बोई गई सरसों में विरलीकरण और खरपतवार नियंत्रण करें। तापमान में गिरावट को देखते हुए फसल में सफेद रतुआ रोग की नियमित निगरानी आवश्यक है। तैयार खेतों में प्याज की रोपाई से पहले गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद व पोटाश उर्वरक अवश्य डालें। हवा में नमी बढ़ने से आलू और टमाटर में झुलसा रोग आने की संभावना रहती है। ऐसे में खेतों की लगातार निगरानी करें और लक्षण दिखने पर डाइथेन M-45 @ 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। टमाटर, फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रोकली की पौधशाला तैयार होने पर मौसम को देखते हुए रोपाई की जा सकती है। गोभी वर्गीय फसलों में पत्ती खाने वाले कीटों की निगरानी करते रहें। कीट प्रकोप अधिक होने पर BT @ 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी या स्पिनोसेड @ 1.0 ml प्रति 3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। सब्जियों में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करते रहें, सिंचाई के बाद उर्वरकों का छिड़काव करें।
आम के बागानों में मिलीबग से सावधान
इस मौसम में मिलीबग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ते हैं। रोकथाम के लिए किसानों को सलाह है कि जमीन से लगभग 0.5 मीटर ऊंचाई तक आम के तने के चारों ओर 25-30 सेमी चौड़ी अल्काथीन पट्टी बांधें। तने के आसपास की मिट्टी की हल्की खुदाई करने से मिलीबग के अंडे भी नष्ट हो जाते हैं।
गेंदे की फसल में पुष्प सड़न रोग का खतरा
आर्द्रता बढ़ने की संभावना को देखते हुए गेंदे की फसल में पुष्प सड़न रोग का खतरा बना रहता है। किसानों को इस रोग की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है ताकि समय पर रोकथाम हो सके।
पराली जलाने पर सख्त चेतावनी
पूसा ने किसानों से साफ कहा है कि धान की पराली न जलाएं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं और फसलों तक सूर्य की किरणें कम पहुंच पाती हैं, जिससे प्रकाश-संश्लेषण और वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसका सीधा असर फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता पर पड़ता है। किसानों को सलाह दी गई है कि धान की पराली को खेत में मिला दें, जिससे मिट्टी की उर्वरकता बढ़ती है और यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद करती है।
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