कृषि समाचार

गैर सब्सिडी खाद पर रोक से खेती और आपूर्ति पर संकट

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नई दिल्ली: देश के दो बड़े कृषि उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गैर सब्सिडी वाली खादों की बिक्री पर रोक लगाए जाने से खेती और उत्पादन को लेकर नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब देश पहले से ही कमजोर मॉनसून और वैश्विक संकटों के कारण खाद आपूर्ति में दबाव झेल रहा है।

राज्यों का तर्क, सब्सिडी के दुरुपयोग पर रोक

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों का कहना है कि कई कंपनियां सब्सिडी वाली खाद के साथ अन्य उत्पादों को जोड़कर बेच रही थीं। इन उत्पादों में जैव प्रोत्साहक, द्रव विशेष खाद और पानी में घुलनशील खाद शामिल हैं। इस प्रकार की बिक्री को रोकने और सब्सिडी के दुरुपयोग पर नियंत्रण के लिए यह कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र ने भी इसी दिशा में आदेश जारी कर इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

उद्योग जगत ने जताई नाराजगी

खाद उद्योग इस फैसले से सहमत नहीं है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और किसानों को संतुलित पोषण नहीं मिल पाएगा। पिछले कई वर्षों से देश में रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, ताकि केवल एक ही प्रकार की खाद पर निर्भरता कम हो सके। ऐसे में इस तरह की रोक को उस दिशा के विपरीत माना जा रहा है।

बड़े कृषि राज्यों पर असर

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश देश की कृषि व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। मध्य प्रदेश अनाज उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है, जबकि दलहन और तिलहन उत्पादन में भी शीर्ष पर है। वहीं उत्तर प्रदेश देश के कुल कृषि उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देता है। ऐसे में इन राज्यों में लिया गया कोई भी निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर असर डाल सकता है।

निवेश और आपूर्ति पर पड़ेगा प्रभाव

उद्योग सूत्रों के अनुसार गैर सब्सिडी खाद का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और इसमें बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। इन खादों में विशेष पोषक तत्व होते हैं, जो उच्च उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए जरूरी माने जाते हैं। इन पर रोक लगाने से निवेश और आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

संगठन ने सुझाया समाधान

खाद क्षेत्र से जुड़े एक प्रमुख संगठन ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए राज्यों से पुनर्विचार की अपील की है। उनका कहना है कि समस्या का समाधान पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि संतुलित नीति होनी चाहिए। सुझाव दिया गया है कि खरीफ सीजन के दौरान इस तरह के आदेशों को लागू न किया जाए, ताकि बुवाई प्रभावित न हो।

खरीफ सीजन पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब खाद की वैश्विक आपूर्ति पहले से दबाव में है, राज्यों के स्तर पर उठाए गए ये कदम स्थिति को और कठिन बना सकते हैं। आने वाले खरीफ सीजन में इन नीतियों का सीधा असर खेती और उत्पादन पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में जरूरी है कि किसान, उद्योग और आपूर्ति व्यवस्था तीनों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लिया जाए।

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