नई दिल्ली: देश में खेती-किसानी तेजी से आधुनिक तकनीक को अपना रही है। इसी बीच शीतकालीन सत्र के दौरान कृषि मंत्रालय ने एक अहम आंकड़ा पेश किया है, जिसके अनुसार 13 राज्यों के किसानों ने खरीफ सीजन 2025 में AI की मदद से मॉनसून की जानकारी लेकर अपनी फसल रोपाई के तरीकों में बदलाव किया। आधे से अधिक किसानों ने एआई-आधारित पूर्वानुमानों के आधार पर बुवाई के निर्णयों को नई परिस्थिति के अनुसार ढाला। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में दी।
एआई पूर्वानुमान से 13 राज्यों के किसानों को मिला बड़ा फायदा
कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन 2025 के लिए 13 राज्यों के चुनिंदा क्षेत्रों में AI आधारित पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जिसमें केवल स्थानीय स्तर पर मॉनसून की शुरुआत की भविष्यवाणी की गई। यह जानकारी किसानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सही बुवाई की तारीख फसल उत्पादन को सीधे प्रभावित करती है। मंत्रालय के अनुसार, एम-किसान पोर्टल के माध्यम से 13 राज्यों के 3,88,45,214 किसानों को हिंदी, ओडिया, मराठी, बांग्ला और पंजाबी भाषाओं में एसएमएस के जरिए मॉनसून आगमन के पूर्वानुमान भेजे गए।
सर्वे में खुलासा: किसानों ने बदली भूमि तैयारी और रोपाई की टाइमिंग
मध्य प्रदेश और बिहार में किसानों को संदेश भेजने के बाद कॉल सेंटरों के माध्यम से सर्वे किया गया। सर्वे परिणाम चौंकाने वाले रहे। 31% से 52% किसानों ने एआई पूर्वानुमान के आधार पर अपनी खेती योजना बदली, जिसमें:
- भूमि की तैयारी
- बुवाई की टाइमिंग
- फसल चयन
- इनपुट मैनेजमेंट
शामिल थे।
125 साल पुराने डेटा से बना AI मॉडल, IMD ने किया सहयोग
सरकार ने बताया कि यह एआई-फोरकास्टिंग प्रणाली (AIFS) मुफ़्त उपलब्ध ओपन-सोर्स मॉडल का उपयोग करके विकसित की गई। यह मॉडल भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 125 वर्षों के ऐतिहासिक वर्षा डेटा पर आधारित है। AI प्रोजेक्ट में इन प्रमुख मॉडलों का उपयोग हुआ:
- NeuralGCM
- ECMWF Artificial Intelligence Forecasting System
- IMD Historical Rainfall Dataset
यह पायलट प्रोजेक्ट IMD और Development Innovation Lab–India के सहयोग से बिल्कुल मुफ्त चलाया गया।
एआई से बढ़ रही फसल उत्पादकता: सरकार का दावा
राज्यसभा में एक अन्य प्रश्न के जवाब में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि सरकार ने फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय सुरक्षित करने के लिए कई एआई-आधारित समाधान अपनाए हैं।
‘किसान ई-मित्र’ चैटबॉट कर रहा किसानों की मदद
- यह एक आवाज़ आधारित AI चैटबॉट है।
- PM-Kisan, PMFBY और KCC से जुड़े सवालों का जवाब देता है।
- कुल 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध।
- रोज़ाना 8,000+ किसानों के प्रश्नों का समाधान।
- अब तक 93 लाख से अधिक प्रश्नों के उत्तर दे चुका है।
कीट व रोग नियंत्रण में AI की बड़ी भूमिका
पर्यावरण में बदलाव के कारण कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने नेशनल पेस्ट सर्विलांस टेक्नोलॉजी की शुरुआत की है।
इसके जरिए:
- एआई और मशीन लर्निंग से कीटों का पहचान
- समय पर अलर्ट
- फसल नुकसान में भारी कमी
संभव हो पाता है।
यह तकनीक:
- 66 फसलों
- 432 से अधिक कीटों
का पता लगाने में सक्षम है।
वर्तमान में 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ता इस सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं।
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