कृषि समाचार

12 फरवरी 2026 के भारत बंद को ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों का समर्थन

Bharat Bandh on 12 February 2026

नई दिल्ली: देशभर में गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल होने जा रही है। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा बुलाए गए भारत बंद को समर्थन दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) समेत कई किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर भी कड़ा ऐतराज जताया है और इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। भारत बंद को लेकर ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का कहना है कि मौजूदा नीतियां मजदूरों की सुरक्षा, रोजगार की स्थिरता और किसानों की आय पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। इसी के विरोध में देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया गया है।

भारत बंद क्यों बुलाया गया है

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट से सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू किसानों को भारी नुकसान होगा। SKM के कन्वीनर हन्नान मूला ने कहा कि इससे भारतीय कृषि कमजोर होगी और किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से इस्तीफे की मांग भी की है। वहीं केंद्र सरकार इस फ्रेमवर्क का बचाव कर रही है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि समझौते में किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया है और कई संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा गया है।

लेबर कोड के खिलाफ ट्रेड यूनियनों का विरोध

10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने चार लेबर कोड का विरोध करते हुए कहा है कि इनसे श्रमिकों की सुरक्षा और जॉब सिक्योरिटी कमजोर होगी। यूनियनों का आरोप है कि नई व्यवस्था से कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों की संख्या बढ़ेगी और स्थायी रोजगार घटेगा। यूनियनों का दावा है कि भारत बंद में करीब 30 करोड़ से ज्यादा मजदूरों के शामिल होने की संभावना है। बंद का समर्थन करने वाले प्रमुख संगठनों में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) शामिल हैं।

किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर

भारत बंद के चलते कई राज्यों में बैंकिंग सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन, डाक सेवाएं और सरकारी दफ्तरों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। हालांकि अस्पताल, मेडिकल सेवाएं, एयरपोर्ट, एम्बुलेंस, एटीएम और अन्य जरूरी सेवाओं के सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है।

सेब किसानों और राज्यों की चिंता

हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक किसान भी विरोध में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि आयात शुल्क में संभावित बदलाव से घरेलू बागानों पर बुरा असर पड़ेगा। ओडिशा कांग्रेस ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए कहा है कि निजीकरण, संविदा रोजगार, ग्रामीण रोजगार सुरक्षा उपायों में बदलाव और प्रस्तावित बिजली विधेयक 2025 जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा। 12 फरवरी 2026 को भारत बंद के दौरान कई जगहों पर प्रदर्शन, रैलियां और सभाएं आयोजित की जाएंगी। किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

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