नासिक: महाराष्ट्र में प्याज किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। गिरते दामों और बढ़ती लागत के कारण किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब किसान सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में बड़ी संख्या में किसानों ने प्रदर्शन किया और सरकार से न्यूनतम मुआवजे की मांग उठाई।
सड़कों पर उतरे किसान, एक्सप्रेसवे जाम
प्याज के गिरते दामों को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लासलगांव मंडी से लेकर समृद्धि एक्सप्रेसवे तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने एक्सप्रेसवे जाम कर दिया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान कई राजनीतिक दलों के नेता भी किसानों के समर्थन में पहुंचे और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
सरकार के रेट को किसानों ने किया खारिज
केंद्र सरकार द्वारा तय 12.35 रुपये प्रति किलो की खरीद दर को किसानों ने पूरी तरह नामंजूर कर दिया है। किसानों का कहना है कि उनकी उत्पादन लागत ही 17 से 20 रुपये प्रति किलो के बीच है, ऐसे में यह मूल्य उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार कम से कम 1500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा दे या 25 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद सुनिश्चित करे।
1 रुपये किलो तक गिरा प्याज का भाव
किसानों के गुस्से की बड़ी वजह हाल ही की एक घटना बनी, जिसमें पैठन के एक किसान को 1,262 किलो प्याज के लिए केवल 1 रुपये प्रति किलो का भाव मिला। कुल मिलाकर उसे सिर्फ 1,262 रुपये ही प्राप्त हुए, जिससे किसानों में भारी नाराजगी फैल गई।
बंपर उत्पादन बना बड़ी वजह
इस बार प्याज की बंपर पैदावार ने भी किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। वर्ष 2024-25 में जहां उत्पादन 115 से 118 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 165 से 170 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति ज्यादा हो गई और कीमतों में भारी गिरावट आई।
मौसम और बढ़ती लागत का डबल असर
किसानों के अनुसार खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। नासिक के एक किसान ने बताया कि 2.5 एकड़ में प्याज उगाने पर करीब 1 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन उन्हें केवल 60 हजार रुपये ही मिल पाए। इसके अलावा ओलावृष्टि और बारिश ने फसल की गुणवत्ता को भी नुकसान पहुंचाया, जिससे कीमत और गिर गई।
निर्यात में गिरावट से बढ़ी मुश्किल
प्याज निर्यात में आई गिरावट ने भी किसानों की कमर तोड़ दी है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है और कंटेनर का किराया 600 डॉलर से बढ़कर 6500 डॉलर तक पहुंच गया है। बांग्लादेश, जो पहले 46 प्रतिशत प्याज आयात करता था, अब केवल 6 प्रतिशत ही खरीद रहा है। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ गई और दाम गिर गए।
सरकारी नीतियों पर उठे सवाल
किसानों ने सरकार की निर्यात नीति और भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोल्ड स्टोरेज और निर्यात को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जाता, तो उन्हें इतना नुकसान नहीं होता। वर्तमान में किसान 600 से 850 रुपये प्रति क्विंटल के बीच प्याज बेचने को मजबूर हैं, जो लागत से काफी कम है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मौजूदा स्थिति से साफ है कि महाराष्ट्र में प्याज किसानों का संकट गहराता जा रहा है और इस समस्या का जल्द समाधान जरूरी हो गया है।
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