मेरठ: केंद्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जय किसान आंदोलन ने कहा है कि धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के MSP में की गई मामूली बढ़ोतरी किसानों की बढ़ती लागत और आर्थिक संकट के मुकाबले बेहद अपर्याप्त है।
MSP बढ़ोतरी पर जय किसान आंदोलन की आपत्ति
जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष भारती ने कहा कि सरकार ने धान के MSP में मात्र ₹72 प्रति क्विंटल तथा मक्का में केवल ₹10 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, जबकि पिछले वर्षों में बीज, खाद, डीजल, बिजली, मजदूरी और सिंचाई की लागत में लगातार भारी वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में यह बढ़ोतरी किसानों को वास्तविक राहत देने में असफल साबित होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ कृषि आधारित एथेनॉल अर्थव्यवस्था और बायोफ्यूल मॉडल को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य देने में गंभीरता नहीं दिखा रही। मक्का और धान दोनों ही एथेनॉल उद्योग से जुड़ी महत्वपूर्ण फसलें हैं, इसके बावजूद MSP वृद्धि बेहद निराशाजनक है।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने की मांग
मनीष भारती ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों की आय बढ़ाना चाहती है तो MSP निर्धारण को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार “C2 लागत + 50 प्रतिशत लाभ” के आधार पर कानूनी गारंटी के साथ लागू करना चाहिए। केवल प्रतीकात्मक बढ़ोतरी से किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं होने वाला।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
जय किसान आंदोलन ने यह भी मांग की कि:
- सभी फसलों पर कानूनी MSP गारंटी लागू की जाए।
- लागत निर्धारण में वास्तविक कृषि खर्चों को शामिल किया जाए।
- एथेनॉल और कृषि उद्योगों से होने वाले लाभ में किसानों की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
- खरीद व्यवस्था को मजबूत कर MSP को जमीन पर प्रभावी बनाया जाए।
जय किसान आंदोलन का मानना है कि किसानों को उनकी उपज का न्यायपूर्ण मूल्य दिए बिना कृषि संकट का समाधान संभव नहीं है।
लेखक: मनीष भारती (मनीष भारती मेरठ, उत्तर प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान और नेता हैं, जो विशेष रूप से खेती और डेयरी व्यवसाय में अपने अभिनव प्रयासों के लिए जाने जाते हैं।)
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