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बिहार सरकार का नया मॉनिटरिंग सेल, जमीन विवाद मामलों में तेजी का दावा

Farmer Registry in UP

पटना: बिहार में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से अपराध और सामाजिक तनाव की बड़ी वजह रहे हैं। बढ़ते मामलों और शिकायतों के दबाव को देखते हुए बिहार सरकार ने अब एक अहम कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम लोगों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया है। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से जन शिकायत पोर्टल पर दर्ज मामलों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निपटारा सुनिश्चित होगा, जिससे लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

मंत्री के निर्देश पर लागू हुई व्यवस्था

यह पहल राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर शुरू की गई है। मंत्री ने साफ कहा है कि शिकायतों के निपटारे में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग के अनुसार, पहले अधिकारियों के बार-बार तबादलों के कारण मामलों के समाधान में देरी हो रही थी। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए मॉनिटरिंग सिस्टम को तत्काल लागू किया गया।

9 अधिकारियों की टीम करेगी निगरानी

मॉनिटरिंग सेल में राजस्व सेवा के 9 अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें कमल नयन कश्यप, संतोष कुमार चौधरी, मो. एजाज आलम, सक्षम सिंह, धीरज कुमार, विजय कुमार राय, पंकज कुमार झा, मनोज कुमार गुप्ता और अनुजा सिन्हा शामिल हैं। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे लंबित मामलों की समीक्षा करें, तकनीकी माध्यमों से निगरानी रखें और तय समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित करें।

तकनीक के जरिए पारदर्शिता पर जोर

इस पूरी व्यवस्था के लिए उप सचिव डॉ. सुनील कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से तकनीकी प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके निपटारे तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रैकिंग योग्य होगी, जिससे हर मामले पर नजर रखी जा सकेगी।

लंबित मामलों में राहत की उम्मीद

सरकार की यह पहल उन हजारों लोगों के लिए राहत लेकर आ सकती है, जिनके मामले लंबे समय से लंबित हैं। इनमें जमीन विवाद, नामांतरण, सीमांकन और खाता-खेसरा सुधार जैसे मामले शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर शिकायत का समय पर और संतोषजनक समाधान हो सके।

जमीनी स्तर पर असर पर निगाह

हालांकि सरकार ने इसे एक बड़ी पहल बताया है, लेकिन इसकी असली परीक्षा जमीनी स्तर पर होगी। क्या अधिकारी समय पर कार्रवाई करेंगे, क्या भ्रष्टाचार और देरी पर रोक लगेगी और क्या आम लोगों को वास्तविक राहत मिलेगी—ये सवाल अभी बाकी हैं। आने वाले समय में ही यह साफ हो पाएगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।

बिहार सरकार की यह पहल जमीन विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो इससे न सिर्फ मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि अपराध और सामाजिक विवादों में भी कमी देखने को मिल सकती है।

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