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सोयाबीन के भाव में मंदी, कई राज्यों में MSP से नीचे पहुंचे दाम

soybean prices

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच संभावित अंतरिम ट्रेड डील की खबरों का असर अब सीधे घरेलू कृषि जिंस बाजार पर दिखने लगा है। अमेरिका से सोयाबीन तेल और डीडीजीएस (DDGS) के आयात की संभावना सामने आते ही सोयाबीन के भाव पर दबाव बढ़ गया है। फरवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में सोयाबीन का राष्ट्रीय औसत थोक भाव घटकर 5,599.25 रुपये प्रति क्विंटल रह गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह 5,773.03 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी महज सात दिनों में औसतन 174 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में MSP से नीचे सौदे

खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5,328 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। हालांकि राष्ट्रीय औसत भाव अभी MSP से थोड़ा ऊपर बना हुआ है, लेकिन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में औसत सौदे MSP से नीचे पहुंच गए हैं।

मध्य प्रदेश में औसत भाव घटकर 5,253.55 रुपये प्रति क्विंटल और महाराष्ट्र में 5,198.90 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इन राज्यों में देश का सबसे अधिक सोयाबीन उत्पादन होता है।

राज्यों में साप्ताहिक गिरावट का हाल

साप्ताहिक आधार पर महाराष्ट्र में सोयाबीन के भाव में 5.7 प्रतिशत, तेलंगाना में 5.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 5.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ में 3.7 प्रतिशत और गुजरात में 2.6 प्रतिशत की नरमी रही। राजस्थान और तमिलनाडु में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य रहा, जहां 2.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ औसत भाव 5,643.85 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

मध्य प्रदेश की मंडियों में ताजा भाव

11 फरवरी को एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश की कई मंडियों में सोयाबीन के भाव 4,200 रुपये से लेकर 5,366 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए। कुछ मंडियों में न्यूनतम भाव 3,251 रुपये प्रति क्विंटल तक भी देखा गया, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है।

मासिक और सालाना आधार पर स्थिति

हालांकि मासिक आधार पर देखें तो जनवरी 2026 की तुलना में अधिकतर राज्यों में सोयाबीन के भाव अब भी 5 से 19 प्रतिशत तक ऊंचे बने हुए हैं। सालाना आधार पर भी कीमतें पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत मजबूत हैं। इसके बावजूद साप्ताहिक गिरावट यह संकेत दे रही है कि बाजार की धारणा कमजोर हो रही है।

आयात बढ़ा तो दबाव और बढ़ेगा

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के अनुसार, सोयाबीन की उत्पादन लागत A2+FL आधार पर लगभग 3,552 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। MSP और लागत के बीच करीब 1,776 रुपये का अंतर कागज पर लाभ दिखाता है, लेकिन जब बाजार भाव MSP से नीचे फिसलते हैं तो यह लाभ किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता।

कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका से डीडीजीएस और सोयाबीन तेल का आयात बढ़ता है तो न केवल सोयाबीन, बल्कि मक्का और ऑयलमील्स के घरेलू बाजार पर भी दबाव और गहरा सकता है।

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