खेती-किसानी

धान की फसल को जड़ गलन रोग से ऐसे बचाएं

Paddy Root Rot

नई दिल्ली, 18 जुलाई 2026: देश के अधिकांश राज्यों में धान की अगेती किस्मों की रोपाई पूरी हो चुकी है और कई क्षेत्रों में रोपाई के 20 से 30 दिन भी बीत चुके हैं। यह समय धान की बढ़वार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसी दौरान जड़ गलन रोग का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। यदि खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहे, जल निकासी की उचित व्यवस्था न हो या गर्मी और उमस का असर बना रहे, तो यह रोग तेजी से फैलकर फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

ऐसे पहचानें जड़ गलन रोग के लक्षण

जड़ गलन रोग के शुरुआती चरण में धान के पौधों की बढ़वार रुक जाती है और पौधे कमजोर दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पर्याप्त नमी होने के बावजूद पौधे मुरझाने लगते हैं। यदि संक्रमित पौधे को उखाड़कर देखा जाए तो उसकी जड़ें काली या भूरी होकर सड़ी हुई दिखाई देती हैं। कई बार जड़ें आसानी से टूट जाती हैं और उनमें दुर्गंध भी आने लगती है। रोग बढ़ने पर पूरा पौधा सूख सकता है, जिससे खेत में खाली स्थान बनने लगते हैं और उत्पादन प्रभावित होता है।

जड़ गलन रोग फैलने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार खेत में लंबे समय तक जलभराव इस रोग का सबसे बड़ा कारण है। लगातार पानी भरा रहने से जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे उनमें सड़न शुरू हो जाती है। खराब जल निकासी, मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और आवश्यकता से अधिक सिंचाई भी इस रोग के फैलने की प्रमुख वजहें हैं।

इन उपायों से करें बचाव

धान की फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए खेत में अतिरिक्त पानी जमा न होने दें और प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था रखें। हर वर्ष एक ही खेत में लगातार धान की खेती करने के बजाय फसल चक्र अपनाएं, जिससे मिट्टी में रोग पैदा करने वाले फफूंद का प्रभाव कम हो सके। रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें और गोबर की सड़ी हुई खाद या अन्य जैविक खाद को प्राथमिकता दें। सिंचाई हमेशा आवश्यकता के अनुसार करें और खेत में लगातार जलभराव न होने दें।

यदि रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि वैज्ञानिक या कृषि विभाग के विशेषज्ञ से सलाह लेकर अनुशंसित फफूंदनाशक का ही प्रयोग करें। समय पर निगरानी, संतुलित पोषण और उचित जल प्रबंधन अपनाकर किसान धान की फसल को जड़ गलन रोग से सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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