नई दिल्ली: बारिश का मौसम पपीते की नई पौध लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधे तेजी से जड़ पकड़ते हैं और उनकी बढ़वार भी अच्छी होती है। हालांकि अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे के लिए सही किस्म का चयन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसान इस मॉनसून पपीते की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो रेड ग्लो किस्म बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। यह उन्नत किस्म एक पौधे से 80 से 100 किलोग्राम तक फल देने की क्षमता रखती है।
रेड ग्लो किस्म की खासियतें
रेड ग्लो पपीता अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों में शामिल है। इस किस्म के पौधों को अपेक्षाकृत कम देखभाल की आवश्यकता होती है और अनुकूल परिस्थितियों में अच्छी पैदावार मिलती है। इस किस्म के फलों का गूदा गहरे लाल रंग का होता है, जिसे स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर माना जाता है। एक फल का औसत वजन 1 से 1.5 किलोग्राम तक होता है। इसकी एक और खासियत यह है कि पौधरोपण के लगभग सात महीने बाद ही फल आना शुरू हो जाते हैं, जिससे किसानों को कम समय में अच्छी आमदनी मिलने की संभावना रहती है।
बीज कहां मिलेंगे और कितनी है कीमत
रेड ग्लो पपीते के बीज राष्ट्रीय बीज निगम के माध्यम से ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं। किसान इन्हें ओएनडीसी के ऑनलाइन मंच से भी मंगा सकते हैं, जहां पपीते के अलावा अन्य फसलों के बीज भी उपलब्ध हैं। वर्तमान में 25 प्रतिशत छूट के बाद लगभग 50 पौधों का पैक करीब 300 रुपये में उपलब्ध है। किसान घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से बीज मंगाकर खेती की शुरुआत कर सकते हैं।
ऐसे करें पपीते की खेती
पपीते की खेती के लिए गर्म जलवायु और अच्छी जल निकासी वाली हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। पौधरोपण से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक खाद मिला दें। इसके बाद पौधों को उचित दूरी पर लगाएं, ताकि उन्हें पर्याप्त धूप और पोषण मिल सके। नियमित नमी बनाए रखने और जलभराव से बचाने पर पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।
घर और बगीचे में भी आसानी से उगा सकते हैं पपीता
यदि आप घर या बगीचे में पपीता लगाना चाहते हैं, तो मिट्टी में कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसके बाद गड्ढा बनाकर पौधा या बीज लगाएं। ध्यान रखें कि मिट्टी भुरभुरी और जल निकासी वाली हो, ताकि पानी जमा न हो। पौधरोपण के बाद हल्की सिंचाई करें। अनुकूल मौसम और उचित देखभाल मिलने पर लगभग 10 दिनों के भीतर अंकुरण शुरू हो जाता है और पौधे तेजी से विकसित होने लगते हैं।
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