नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती के बीच खेती को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से नीति आयोग ने वर्ष 2035 तक का बायो इकॉनमी का रोडमैप जारी किया है। इस रोडमैप में कृषि क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य किसानों तक आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी आधारित समाधान पहुंचाना, जलवायु अनुकूल फसल किस्मों का विकास करना और गुणवत्तापूर्ण जैव उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देना है। नीति आयोग का लक्ष्य वर्ष 2035 तक देश की बायो अर्थव्यवस्था को 691 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाना है, जिससे कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और जैव आधारित उद्योगों को नई गति मिल सके।
कृषि में नई तकनीकों से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
रोडमैप के तहत छह राष्ट्रीय जैव मिशनों का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें कृषि से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण मिशन ‘एग्रीबायो 2.0’ है। इस मिशन का उद्देश्य ऐसी फसल किस्मों का विकास करना है, जो सूखा, अधिक वर्षा, बढ़ते तापमान और बदलती जलवायु जैसी परिस्थितियों का सामना कर सकें। इसके साथ ही किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले जैव उत्पाद उपलब्ध कराने और नई जैव प्रौद्योगिकी को खेत तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। नीति आयोग का मानना है कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और बदलते मौसम के बावजूद किसानों को स्थिर उपज प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
समुद्री खेती से खुलेंगे आय के नए रास्ते
रोडमैप में समुद्री जैव प्रौद्योगिकी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके अंतर्गत समुद्री शैवाल की खेती और उससे बनने वाले जैव उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। इससे तटीय क्षेत्रों के किसानों और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों के लिए अतिरिक्त आय के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही जैव आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
अनुसंधान से बाजार तक पहुंचेगी नई तकनीक
नीति आयोग ने वर्ष 2026 से 2035 के बीच 50 हजार करोड़ रुपये के बायो अर्थव्यवस्था विकास कोष की स्थापना का प्रस्ताव रखा है। इस कोष का उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों में विकसित नई तकनीकों को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाना है। इसके अलावा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं को बढ़ावा देने, स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बौद्धिक संपदा संरक्षण को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि नवाचार तेजी से किसानों और उद्योगों तक पहुंच सके।
वर्ष 2035 तक तय किए गए बड़े लक्ष्य
नीति आयोग के अनुसार पिछले दस वर्षों में भारत की बायो अर्थव्यवस्था 16 गुना बढ़कर 195.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है और इसका योगदान देश की सकल घरेलू उत्पाद में 4.8 प्रतिशत है। अब वर्ष 2035 तक इसे 691 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही तीन करोड़ से अधिक उच्च कौशल आधारित रोजगार सृजित करने और भारत को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में शामिल करने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इस रोडमैप से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और जैव आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और खेती भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सक्षम बन सकेगी।
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