कृषि समाचार

फरवरी की गुनगुनी धूप से खेतों में लौटी रौनक, किसानों में बढ़ा काम का उत्साह

February's warm sunshine Farm

लखनऊ: जनवरी की कड़ाके की ठंड के बाद अब फरवरी की गुनगुनी धूप ने किसानों को बड़ी राहत दी है। ठिठुरन और कोहरे के असर से बाहर निकलकर अब किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों की ओर लौट रहे हैं। मौसम में आए इस बदलाव से न केवल काम करने की अनुकूलता बढ़ी है, बल्कि बीमारियों का खतरा भी कम हुआ है। खेतों में हरियाली के साथ हलचल तेज हो गई है और जायद व बसंतकालीन फसलों की तैयारी जोरों पर है।

नकदी फसलों से बदल सकती है किस्मत

फरवरी की गुनगुनी धूप कृषि कार्यों के अनुकूल है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई शुरू करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए। किसान नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेकर बीज का चुनाव करें और बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक से उपचारित करना अनिवार्य रखें।

जिन किसानों को गन्ने की पेड़ी फसल रखनी है, उन्हें कटाई जमीन की सतह से सटाकर करनी चाहिए। जायद मौसम की सब्जियों में भिंडी की बुवाई के लिए भी यही समय अनुकूल है। कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखते हुए बुवाई करने पर अगेती उपज मिल सकती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है।

15 से 29 फरवरी के बीच सूरजमुखी की बुवाई

तेल वाली फसलों में सूरजमुखी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प है। विशेषज्ञों का कहना है कि 15 से 29 फरवरी के बीच इसकी बुवाई करना सर्वोत्तम रहता है। बीजों को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित कर बोना चाहिए। गर्मियों के टमाटर की फसल के लिए अभी रोपाई का सही समय है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए। रोपाई हमेशा शाम के समय करने की सलाह दी जाती है, ताकि पौधों को तेज धूप से नुकसान न पहुंचे। जिन किसानों ने पहले ही टमाटर की रोपाई कर ली है, उन्हें पौधों की बेहतर बढ़वार के लिए यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन की मात्रा देनी चाहिए।

विभिन्न राज्यों में कृषि कार्यों की स्थिति

पंजाब में पके गन्ने की कटाई, प्याज की रोपाई तथा सूरजमुखी और मक्का की बुवाई की जा रही है। उत्तर प्रदेश में बसंतकालीन गन्ने और प्याज की रोपाई का काम जारी है। बिहार में पके जिमीकंद, आलू और हल्दी की कटाई के साथ टमाटर की रोपाई हो रही है।

नागालैंड में मटर, रेपसीड, आलू, कोल फसलों और प्याज की पकी फलियों की कटाई की जा रही है। गुजरात में अरंडी के गुच्छों, अरहर और आलू की कटाई तथा कपास की चुनाई चल रही है। कर्नाटक में पके गन्ने, सुपारी, अदरक और हल्दी की कटाई, कपास की चुनाई तथा हरी मटर, लोबिया, मूंग, उड़द की बुवाई और चावल की रोपाई का कार्य किया जा रहा है।

फरवरी का यह अनुकूल मौसम किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान समय पर बुवाई और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, तो जायद और बसंतकालीन फसलों से बेहतर उत्पादन और मुनाफा हासिल किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें: डिजिटल गवर्नेंस से यूपी में 5 मिनट में किसान ऋण को मंजूरी

Related posts

Leave a Comment