जयपुर: राजस्थान में जायद फसलों को लेकर कृषि विभाग ने महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विभाग के अनुसार जायद में पारंपरिक रूप से ली जाने वाली मूंग फसल की तुलना में मूंगफली और उड़द की खेती अधिक लाभकारी और उत्पादक साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच इन दोनों फसलों की बुवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
उड़द की उन्नत किस्में और उत्पादन क्षमता
कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उड़द की उन्नतशील किस्में जैसे IPU-10-26, IPU-11-02, IPU-13-1, पंत उड़द-8 और कोटा उड़द-3 (KPU-524-65) अपनाने से 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन लिया जा सकता है। ये किस्में पीला मोजेक (MYMV), पत्ती मरोड़ (ULCV) और पावडरी मिल्ड्यू जैसे प्रमुख रोगों के प्रति रोगरोधक हैं। उड़द की खेती में 15 से 18 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई, बीज उपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन और 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई की सलाह दी गई है।
जायद में मूंगफली बेहतर विकल्प
वहीं राजस्थान में जायद के अंतर्गत्त मूंगफली को एक और बेहतर व लाभकारी विकल्प बताया गया है। गिरनार-4/5, GG-37/35, GJG-32, K-1812, TCGS-1157 (नित्य हरता) और TAG-73 जैसी किस्में रोग प्रतिरोधक होने के साथ 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम हैं। मूंगफली की खेती के लिए 100 से 120 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर, उचित बीज उपचार, NPK 20:80:20 पोषण प्रबंधन और 12 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की सिफारिश की गई है।
खरपतवार और कीट प्रबंधन पर जोर
कृषि विभाग ने किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर निराई-गुड़ाई करने और कीट प्रबंधन के लिए लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप तथा मित्र कीटों के उपयोग की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि इन सिफारिशों को अपनाकर किसान जायद सीजन में लागत कम कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
मौसम को लेकर किसानों को सतर्क रहने की सलाह
इसके साथ ही किसानों को मौसम के प्रति सतर्क रहने की अपील की गई है। इस सीजन में तापमान में उतार-चढ़ाव और बारिश की संभावना को देखते हुए फसलों की नियमित निगरानी जरूरी है। कई फसलें पकने की अवस्था में हैं, जिन पर खराब मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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