पटना: बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने और नई चीनी मिलों की स्थापना को लेकर राज्य सरकार ने तेज पहल शुरू कर दी है। इसी क्रम में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (NFCSF), इंडियन पोटाश लिमिटेड, गन्ना उद्योग विभाग और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सहकारी मॉडल के माध्यम से गन्ना किसानों और उद्यमियों के हित में नई चीनी मिलों की स्थापना पर विस्तृत चर्चा की गई।
सहकारी मॉडल पर चीनी मिलों की स्थापना
बैठक में NFCSF के प्रबंध निदेशक ने बिहार सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बिहार में बंद चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए संघ पूरा सहयोग करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी। वहीं इंडियन पोटाश लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक ने सहकारी-सह-निजी (कोऑपरेटिव-कम-प्राइवेट) मॉडल के तहत चीनी मिलों की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
सकरी-रैयाम में काम तेज
विकास आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) में सहकारी मॉडल पर चीनी मिलों की स्थापना की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने सहकारिता विभाग के सचिव को NFCSF के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गन्ना उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
बैठक में बसंतकालीन और शरदकालीन बुआई सत्र में गन्ना उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही वर्षा ऋतु में जल-जमाव की समस्या के समाधान पर विचार किया गया, ताकि प्रस्तावित चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध कराया जा सके।
किसानों और उद्योग को मिलेगा लाभ
बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव मयंक वरवडे, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी, गन्ना आयुक्त अनिल कुमार झा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि इन पहलों से बिहार के गन्ना किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के चीनी उद्योग को नई गति मिलेगी।
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