नई दिल्ली: बजट 2026 में मत्स्य क्षेत्र को लेकर केंद्र सरकार ने दो बड़े और दूरगामी फैसलों की रूपरेखा पेश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान जलाशयों में केज कल्चर को बढ़ावा देने और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य संपदा के टिकाऊ दोहन पर सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। इसका सीधा असर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप क्षेत्र के मछुआरों, फिश एक्सपोर्ट और समुद्री अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है।
सरकार ने साफ किया कि अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के आसपास मौजूद विशाल EEZ क्षेत्र में मत्स्य संसाधनों का दोहन पूरी तरह टिकाऊ मॉडल पर किया जाएगा। इसी कड़ी में हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को आधिकारिक तौर पर टूना क्लस्टर घोषित किया गया है। यह क्षेत्र करीब 6 लाख वर्ग किलोमीटर के EEZ में फैला हुआ है और हाई वैल्यू फिशरी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
टूना क्लस्टर से बदलेगी समुद्री अर्थव्यवस्था
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में टूना जैसी महंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा मांग वाली मछलियों का बड़ा भंडार मौजूद है। अनुमान के मुताबिक यहां करीब 60 हजार मीट्रिक टन टूना संसाधन उपलब्ध हैं। टूना क्लस्टर घोषित होने से तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों की आय बढ़ने, संगठित फिशिंग को बढ़ावा मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह इलाका दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बेहद करीब है, जिससे समुद्री और हवाई मार्ग से एक्सपोर्ट की संभावनाएं मजबूत होती हैं। खासतौर पर जापान, कोरिया और अन्य एशियाई देशों में टूना की भारी मांग को देखते हुए भारत के लिए नया और मजबूत बाजार तैयार हो सकता है।
केज कल्चर पर सरकार का जोर
बजट 2026 में सरकार ने देशभर के करीब 500 जलाशयों में केज कल्चर को बढ़ावा देने की भी घोषणा की है। केज कल्चर से जलाशयों में नियंत्रित तरीके से मछली पालन किया जा सकता है, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। इसका लाभ अंतर्देशीय मछुआरों को मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
फिश एक्सपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार
फिलहाल भारत से सीफूड एक्सपोर्ट करीब 60 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान झींगा का रहा है। सरकार का लक्ष्य निकट भविष्य में इसे एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है। इस लक्ष्य को हासिल करने में अब टूना और अन्य हाई वैल्यू समुद्री प्रजातियों को अहम भूमिका में लाया जा रहा है।
इसी रणनीति के तहत नवंबर में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया था। यह आयोजन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से किया गया, ताकि निजी निवेश, आधुनिक तकनीक और प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा सके।
मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद
सरकार का मानना है कि EEZ आधारित फिशरी विकास, टूना क्लस्टर और केज कल्चर जैसी पहल से न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। बजट 2026 में की गई ये घोषणाएं भारत को वैश्विक फिशरी बाजार में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं।
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