पटना: बिहार में खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है। राज्य सरकार के अनुसार अब तक 50 लाख से अधिक किसानों की फार्मर पहचान तैयार की जा चुकी है, जिससे किसानों को एक डिजिटल पहचान मिल रही है। इस पहल का उद्देश्य किसानों तक सरकारी योजनाओं को तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचाना है। यह योजना खेती को आधुनिक बनाने और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर किसान को इस व्यवस्था से जोड़ा जाए।
योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को खाद, बीज, फसल सहायता और कृषि ऋण जैसी सुविधाएं सीधे उनके खाते में मिल सकेंगी। इससे पहले किसानों को इन योजनाओं का लाभ लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब डिजिटल प्रणाली के माध्यम से यह प्रक्रिया सरल और तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी, जिससे किसानों को सही लाभ मिल सकेगा।
दूसरे चरण में तेज हुआ अभियान
इस योजना का दूसरा चरण 12 मई से शुरू होकर 30 जून तक चल रहा है। पहले चरण में करीब 47 लाख 85 हजार किसानों का पंजीकरण किया गया था। अब सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसानों को इस डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि सभी को योजनाओं का लाभ मिल सके।
जमीन और रिकॉर्ड होंगे डिजिटल
इस पहल का एक बड़ा लाभ यह है कि किसानों की जमीन और खेती से जुड़े रिकॉर्ड अब डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जा रहे हैं। इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी और रिकॉर्ड को अपडेट करना भी आसान होगा। किसानों को अब अपने दस्तावेजों में बदलाव या सुधार के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होगी।
खेती में तकनीक से मिलेगा नया सहारा
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किसानों को खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे उन्हें सही फसल चयन, बेहतर बीज और सरकारी सहायता की जानकारी मिलती रहेगी। यह पहल बिहार में खेती को आधुनिक बनाने और किसानों की आय व सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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