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बाढ़ से फसलों का नुकसान, किसानों को कृषि वैज्ञानिकों ने दी सलाह

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी शुरू

नई दिल्ली: इस साल देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ से फसलों का नुकसान भारी मात्रा में हुआ है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्यों में हजारों हेक्टेयर खेत जलमग्न हो गए, जिससे धान, मक्का, गन्ना और बागवानी फसलों को बर्बादी झेलनी पड़ी। किसानों के इस संकट को देखते हुए आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), करनाल के वैज्ञानिकों ने किसानों की आजीविका बचाने और नुकसान कम करने के लिए जरूरी सलाह जारी की है।

बाढ़ प्रभावित खेतों के लिए क्या करें किसान?

आईएआरआई करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिव के. यादव ने कहा कि किसानों को सबसे पहले खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए। जहां गाद (सिल्ट) जमा हो गई है, वहां मिट्टी की गहरी जुताई और उपचार ज़रूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसान मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जैविक खाद और नाइट्रोजन का उपयोग करें। जिन खेतों में पानी रुका हुआ है, वहां पंप या नालियों से जल निकासी करें। बाढ़ से गाद की मोटी परत जमी हो तो खेत की लेवलिंग और मिट्टी सुधार करें।

कटाई के बाद फसलों की सुरक्षा

डॉ. यादव ने कहा कि बचे हुए धान, मक्का और फलों को सड़ने से बचाने के लिए किसानों को उन्हें तिरपाल पर ऊंचे चबूतरे पर सुखाना चाहिए। वहीं क्षतिग्रस्त मक्का और धान के भूसे को साइलेज बनाकर पशुओं के चारे के रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ की इस आपदा ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कृषि को जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए बेहतर जल निकासी, फसल विविधीकरण, जलवायु-प्रतिरोधी किस्में और आपदा प्रबंधन योजनाएं जरूरी हैं।

किन फसलों को कितना नुकसान?

आईएआरआई की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संगीता यादव ने बताया कि इस बार खरीफ फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।

हरियाणा और पंजाब: बासमती धान, मक्का, गन्ना और कपास को भारी नुकसान।

हिमाचल प्रदेश: भूस्खलन और गाद से सेब के बाग प्रभावित।

उत्तराखंड: धान में ब्लास्ट रोग और दालों को नुकसान।

जम्मू-कश्मीर: धान, मक्का, सब्जियां और सेब की फसलें बर्बाद।

लद्दाख: कुट्टू, जौ और खुबानी की फसल चौपट।

फसलवार वैज्ञानिकों की सलाह

धान: खेत से पानी निकालें और नाइट्रोजन व पोटाश का छिड़काव करें।

मक्का: जल निकासी के लिए नालियां बनाएं और तना सड़न रोग पर नजर रखें।

कपास: जड़ सड़न और कीट प्रबंधन पर ध्यान दें।

गन्ना: समय पर नाइट्रोजन का छिड़काव करें।

सब्जियां: पानी निकालें, क्षतिग्रस्त पौधों की छंटाई करें और सुरक्षात्मक रसायनों का प्रयोग करें।

बागवानी: गाद हटाएं, जल निकासी सुधारें और जड़ सड़न के लिए कवकनाशी का प्रयोग करें।

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