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केज कल्चर से मछली पालन: यानी कम लागत में ज्यादा उत्पादन का मॉडल

fish farming through cage culture

नई दिल्ली: देश में मछली पालन के क्षेत्र में केज कल्चर तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है. खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में यह तकनीक कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी का जरिया बनती जा रही है. केन्द्र और राज्य सरकारें भी केज कल्चर से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मोटी सब्सिडी दे रही हैं. केन्द्रीय मत्स्य पालन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर के जलाशयों में करीब 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ऐसा है, जहां केज तकनीक के जरिए मछली पालन किया जा सकता है.

केज कल्चर क्या है और क्यों बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता

फिशरीज एक्सपर्ट के मुताबिक मछली पालन के लिए अब तालाब बनाना जरूरी नहीं है. गांव या शहर के आसपास मौजूद डैम, जलाशय, कोल और स्टोन पिट्स में केज तकनीक के जरिए मछली पालन किया जा सकता है. केज एक विशेष जाल या संरचना होती है, जिसे जलाशय में स्थापित कर उसके भीतर मछलियों का गहन पालन किया जाता है. इससे कम जगह में ज्यादा उत्पादन संभव हो पाता है.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिल रही सब्सिडी

केज कल्चर को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत केन्द्र सरकार मछली पालकों को वित्तीय सहायता दे रही है. राज्य सरकारें भी केज निर्माण, मछली बीज खरीद, फीड, रखरखाव और मरम्मत तक पर सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं. इससे डैम, जलाशय और खनन के बाद बने गड्ढों का भी बेहतर उपयोग हो रहा है.

केज तकनीक से मछली पालन के बड़े फायदे

केज में गहन पालन और संतुलित आहार से उत्पादन में तेजी आती है.
एक केज से सालाना तीन से चार टन तक मछली उत्पादन संभव है.
जलाशयों का बेहतर और पूर्ण उपयोग होता है.
जमीनी तालाबों की जरूरत कम होने से पर्यावरण संतुलन बना रहता है.
पंगेसियस, तिलापिया और भारतीय मेजर कार्प जैसी उच्च मूल्य की प्रजातियों से अच्छी आय होती है.
फीड सप्लाई, जाल निर्माण, रखरखाव, कटाई और मार्केटिंग से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं.
केज का उपयोग मछली बीज उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है.
जरूरत के अनुसार केज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है.
उत्पादन के साथ-साथ मछली की वैरायटी भी बढ़ती है.
स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के माध्यम से सामूहिक मछली पालन को बढ़ावा मिलता है.

राज्यवार केज कल्चर की संभावनाएं (हेक्टेयर में)

झारखंड – 115,514
मध्य प्रदेश – 601,604
कर्नाटक – 485,662
राजस्थान – 400,298
गुजरात – 347,875
उत्तर प्रदेश – 334,840
महाराष्ट्र – 229,591
ओडिशा – 200,379
तेलंगाना – 191,000
तमिलनाडु – 127,952

ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लिए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि केज कल्चर तकनीक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार, आय और पोषण सुरक्षा को मजबूत कर रही है. सरकारी सब्सिडी और तकनीकी सहयोग के साथ केज कल्चर आने वाले समय में मछली पालन का एक प्रभावी और लाभकारी मॉडल बन सकता है.

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