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उत्तर प्रदेश में गोपैथी सेंटर से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को अब एक नई दिशा देते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार, वैज्ञानिक खेती और पारंपरिक चिकित्सा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गांव-गांव गोपैथी केंद्र स्थापित करने की तैयारी में है। इस पहल के जरिए पंचगव्य आधारित चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार किए जाएंगे। यह जानकारी प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने दी।

गो संरक्षण से जुड़ेगा रोजगार और कृषि

इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य गो सेवा को आर्थिक विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र से जोड़ना है। इसके तहत गोशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र न रखकर उन्हें जैविक खेती, पंचगव्य उत्पाद निर्माण और ग्रामीण उद्योगों का केंद्र बनाया जाएगा। इससे गांवों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

पंचगव्य आधारित चिकित्सा पर जोर

पंचगव्य आधारित चिकित्सा पद्धति को आयुर्वेद और अनुसंधान के साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पंचगव्य उत्पाद मधुमेह, माइग्रेन, लकवा, हृदय रोग, त्वचा और पाचन से जुड़ी समस्याओं में सहायक भूमिका निभा सकते हैं। इस पद्धति में गाय से प्राप्त दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का उपयोग विभिन्न औषधीय उत्पादों के रूप में किया जाता है।

गांव स्तर पर तैयार होंगे उत्पाद

योजना के तहत गांवों में पंचगव्य आधारित मंजन, मरहम और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन और विपणन का नेटवर्क बनाया जाएगा। इससे सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा

प्रदेश में पंचगव्य उत्पादों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन भी किए जा रहे हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता, त्वचा की देखभाल और पाचन सुधार जैसे क्षेत्रों में इनके संभावित लाभों पर शोध जारी है। सरकार इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर इसे मजबूत आधार देने की दिशा में काम कर रही है।

देश का सबसे बड़ा मॉडल बनने की तैयारी

राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को गोपैथी केंद्रों के मामले में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनाना है। इस पहल के जरिए गो संरक्षण को आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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