मौसम का हाल

अल नीनो के संकेत तेज, भारत में कमजोर मानसून की आशंका

El Nino 2026

नई दिल्ली: दुनियाभर की मौसम एजेंसियों की नजरें इस समय प्रशांत महासागर पर टिकी हुई हैं, जहां समुद्र के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी ने अल नीनो की वापसी के संकेत मजबूत कर दिए हैं। फिलहाल महासागरीय और वायुमंडलीय स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन समुद्र की सतह और उसके नीचे लगातार बढ़ती गर्मी आने वाले महीनों में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख मौसम एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जून तक समुद्र की सतह का तापमान अल नीनो की सीमा को पार कर सकता है।

मौसम पैटर्न में बदलाव के संकेत

हालांकि अभी हवा के दबाव, बादलों के स्वरूप और व्यापारिक हवाओं की स्थिति पूरी तरह अल नीनो जैसी नहीं बनी है, लेकिन इनका रुझान उसी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई मौसम मॉडल मध्यम स्तर के अल नीनो की संभावना जता रहे हैं, जबकि कुछ मॉडल इसके अधिक प्रभावी होने की आशंका भी व्यक्त कर रहे हैं। खासतौर पर मध्य प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी वैज्ञानिकों की चिंता का कारण बनी हुई है।

भारत के मानसून पर पड़ सकता है असर

भारत के लिए अल नीनो का बनना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ जाता है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही, मानसून की शुरुआत में देरी और वर्षा में कमी की आशंका भी जताई गई है।

पिछले अनुभव से बढ़ी चिंता

वर्ष 2023 में बने अल नीनो का असर लंबे समय तक देखने को मिला था, जिसने देश के मौसम और कृषि पर व्यापक प्रभाव डाला। उस दौरान कम वर्षा के कारण धान और दलहन जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हुई थी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसका असर अगले वर्ष तक बना रहा, जिससे तापमान में असामान्य वृद्धि देखी गई।

समुद्री गतिविधियों से मिल रहे संकेत

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री गतिविधि सक्रिय है, जिससे पश्चिमी हवाओं के मजबूत होने की संभावना है। ये हवाएं समुद्र के तापमान को और बढ़ा सकती हैं, जिससे अल नीनो बनने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है।

हिंद महासागर की स्थिति फिलहाल सामान्य

वहीं हिंद महासागर की स्थिति अभी सामान्य बनी हुई है। हालांकि आने वाले महीनों में इसमें बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि वर्ष के अंत तक इसमें सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है, जो मानसून के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर सकता है।

समुद्र के कई हिस्सों में सामान्य से 3 से 4 डिग्री अधिक तापमान दर्ज किया गया है, खासकर तटीय क्षेत्रों में। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की यह अतिरिक्त गर्मी आने वाले समय में वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित कर सकती है, जिसका सीधा असर भारत सहित कई देशों के मानसून और कृषि पर पड़ेगा।

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