मुंबई: महाराष्ट्र में प्याज की कीमत को लेकर सियासी और कृषि विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर किसानों को कम भाव मिलने से नाराजगी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार केंद्र द्वारा तय कीमत का बचाव कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार ने प्याज की कीमत बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलो कर दी है, जो पहले से अधिक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और समाधान के लिए केंद्र के साथ बातचीत जारी है।
सड़कों पर उतरे किसान, राजमार्ग जाम
जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। नासिक समेत कई इलाकों में प्याज उत्पादक किसानों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। ‘कांदा उत्पादक शेतकरी क्रांति महामोर्चा’ के तहत किसानों ने मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
बैलगाड़ी पर सवार होकर नेताओं ने किया प्रदर्शन
इस आंदोलन में विभिन्न दलों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। बैलगाड़ी पर सवार होकर कई नेता किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। इस दौरान किसानों ने अपनी समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाया और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
किसानों की मांगें और आर्थिक संकट
किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा तय 1,580 रुपये प्रति क्विंटल का भाव बहुत कम है और इससे उनकी लागत भी नहीं निकल रही है। वे कम से कम 24 रुपये प्रति किलो कीमत और 3,000 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं। किसानों ने यह भी बताया कि कई लोग कर्ज के बोझ तले दबे हैं और बच्चों की पढ़ाई व इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। कुछ किसानों को बाजार में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिलने की बात भी सामने आई है, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो गई है। किसानों का कहना है कि केवल घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि खरीद प्रक्रिया को जमीन पर लागू करना जरूरी है।
आंदोलन को बताया गया राजनीतिक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आंदोलन को राजनीतिक बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल दिखावे के लिए किसानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए मिठाइयां बांटी और तंज कसा कि यदि प्याज भी उपहार में दिया जाए तो शायद उसकी कीमत बढ़ जाए।
बढ़ती मांगों के बीच समाधान की तलाश
किसानों की प्रमुख मांगों में 3,000 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय करना, बेचे गए प्याज पर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल सहायता, निर्यात पर लगी रोक हटाना और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। मौजूदा हालात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य कब मिलेगा। जहां सरकार बाजार संतुलन की बात कर रही है, वहीं किसान इसे अपनी आजीविका का मुद्दा मानते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं।
ये भी पढ़ें: गेहूं के दाम दबाव में, समर्थन मूल्य से नीचे बिक रही फसल
