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मध्यप्रदेश में गेहूं की रिकॉर्ड खरीद, किसानों को बड़ा लाभ

MP wheat procurement record

भोपाल: मध्यप्रदेश ने इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसमें बड़ी संख्या में लघु और सीमांत किसान शामिल हैं, जिनसे 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। प्रदेश में खरीदी प्रक्रिया अभी भी जारी है।

लक्ष्य से अधिक हुआ उपार्जन

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि कोविड अवधि को छोड़कर पिछले एक दशक में यह सबसे बड़ा उपार्जन है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से केंद्र द्वारा निर्धारित 78 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया था, जिसे प्रदेश ने पार कर लिया है। मुख्यमंत्री लगातार खरीदी व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं और विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण कर किसानों से सीधे संवाद भी कर रहे हैं। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खरीदी की अंतिम तिथि 28 मई तक बढ़ा दी गई है।

किसानों को मिला रिकॉर्ड भुगतान

प्रदेश सरकार ने किसानों को अब तक 22,842.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। इस वर्ष किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस प्रकार कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली है।

खरीदी केंद्रों पर बढ़ाई गई सुविधाएं

सरकार ने खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त तौल कांटे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक और भुगतान जारी करने का समय रात 12 बजे तक कर दिया गया है। इसके साथ ही सप्ताह में 6 दिन खरीदी का कार्य जारी रखा जा रहा है।

किसानों के लिए बेहतर इंतजाम

केंद्रों पर पीने के पानी, छाया, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही बारदाना, मजदूर, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और गुणवत्ता जांच के उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।

भंडारण की मजबूत व्यवस्था

सरकार ने खरीदे गए गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी केंद्र पर अव्यवस्था न हो और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस रिकॉर्ड उपार्जन के साथ मध्यप्रदेश ने न केवल अपनी कृषि क्षमता को साबित किया है, बल्कि किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।

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