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नई चीनी मिलों की स्थापना में बड़ा बदलाव, दूरी के नियम हुए सख्त

Establishment of New Sugar Mills

नई दिल्ली: देश में चीनी की खपत में ठहराव और बदलती खानपान आदतों के बीच सरकार ने चीनी उद्योग को संतुलित करने के लिए बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत अब नई चीनी मिलों की स्थापना के नियमों को सख्त किया जाएगा, जिससे गन्ने की उपलब्धता और उद्योग का संतुलन बनाए रखा जा सके।

नई मिलों के लिए दूरी बढ़ाने का प्रस्ताव

सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि अब किसी भी नई चीनी मिल को पहले से मौजूद मिल से कम से कम 25 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थापित किया जा सकेगा। पहले यह दूरी 15 किलोमीटर थी। इस बदलाव का उद्देश्य एक ही क्षेत्र में अधिक मिलों की भीड़ को रोकना और गन्ने की आपूर्ति पर दबाव कम करना है।

राज्यों को मिलेगा अधिक अधिकार

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि कोई मौजूदा चीनी मिल अपनी क्षमता बढ़ाना चाहती है, तो इसका निर्णय राज्य सरकार करेगी। राज्य यह सुनिश्चित करेगी कि गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता हो और किसानों या अन्य मिलों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

चीनी की खपत में ठहराव

पिछले कुछ वर्षों में देश में चीनी की खपत लगभग स्थिर बनी हुई है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में करीब 280 लाख टन खपत हो सकती है, जो पिछले वर्ष के बराबर है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और खानपान में बदलाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

गुड़ और खांडसारी की बढ़ती मांग

ग्रामीण और छोटे शहरों में गुड़ और खांडसारी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन्हें स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है, जिससे चीनी की मांग पर असर पड़ा है। इसी को देखते हुए सरकार खांडसारी इकाइयों को भी नियमन के दायरे में लाने की दिशा में काम कर रही है।

किसानों और उद्योग पर प्रभाव

इस प्रस्ताव का असर किसानों और उद्योग दोनों पर पड़ेगा। एक ओर गन्ने की उपलब्धता संतुलित रहने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर नए निवेशकों के लिए नियम कड़े होने से नई मिलों की स्थापना धीमी हो सकती है। सरकार ने इस प्रस्ताव पर सुझाव आमंत्रित किए हैं और अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की राय ली जाएगी। बदलते बाजार और उपभोक्ता रुझानों को देखते हुए यह कदम चीनी उद्योग को अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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