नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए आसान ऋण व्यवस्था पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि साहूकारी और ऊंचे ब्याज के बोझ से किसानों को राहत दिलाने के लिए कृषि वित्त तंत्र को सरल, व्यावहारिक और संवेदनशील बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड से किसानों को राहत मिली है, लेकिन अब इसे और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता
सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए बैंक से ऋण लेना आज भी जटिल प्रक्रिया है। कागजी कार्यवाही, विभिन्न स्तरों की औपचारिकताएं और लंबी प्रक्रियाएं किसानों के लिए बड़ी बाधा बनती हैं। ऐसे में ऋण प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना बेहद जरूरी है।
व्यवस्था में संवेदना और संतुलन जरूरी
उन्होंने कहा कि किसानों के साथ व्यवहार में संवेदना और सम्मान होना चाहिए। किसान कोई याचक नहीं, बल्कि अपने अधिकार के लिए व्यवस्था के पास आता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई किसान कर्ज के बोझ में फंस जाते हैं और उन्हें राहत के लिए व्यवहारिक समाधान की जरूरत होती है।
ग्रामीण बैंकिंग में संसाधनों की कमी
मंत्री ने ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बढ़ते काम के दबाव के बावजूद पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं, जिससे किसानों को लंबी दूरी तय करने के बाद भी समय पर सेवा नहीं मिल पाती। इस स्थिति को सुधारने के लिए मानव संसाधन बढ़ाने पर ध्यान देना जरूरी है।
प्रगतिशील किसानों को अधिक सहयोग
उन्होंने कहा कि उन्नत खेती, बागवानी और नई तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को अधिक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में प्रगतिशील किसानों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि वे आधुनिक खेती की ओर बढ़ सकें।
छोटे किसानों के लिए एकीकृत खेती मॉडल
छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को अपनाने पर जोर दिया गया। इसमें फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन और अन्य गतिविधियों को जोड़कर आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
मंत्री ने कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका क्रियान्वयन सरल और प्रभावी होगा। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे व्यवहारिक सोच के साथ काम करें और किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को सुविधा मिले और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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