कृषि समाचार

राजस्थान के रेतीले इलाकों में गेहूं की फसल पर चूहों का बढ़ता खतरा

In the sandy areas of Rajasthan

जयपुर: राजस्थान के रेतीले इलाकों में शुष्क वातावरण के कारण चूहों की समस्या गंभीर होती जा रही है। खासकर गेहूं की फसल को चूहों से भारी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि जनवरी महीने से ही चूहों की रोकथाम के उपाय नहीं किए गए, तो इनके प्रकोप से फसल की व्यापक तबाही हो सकती है। राज्य के शुष्क इलाकों में लगभग 17 प्रकार के चूहे पाए जाते हैं, जिनकी प्रजनन क्षमता बेहद तेज होती है।

चूहों की तेजी से बढ़ती संख्या बनी चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि एक चुहिया एक बार में 1 से 10 बच्चों को जन्म देती है और इनका प्रसूतिकाल केवल 26 से 30 दिनों का होता है। यही कारण है कि कम समय में इनकी संख्या तेजी से बढ़ जाती है। ये चूहे न केवल खड़ी फसल के दानों को खाते हैं, बल्कि लंबी सुरंगें बनाकर मिट्टी को खोखला कर देते हैं, जिससे पौधों की जड़ें सूख जाती हैं और पूरी फसल नष्ट होने की स्थिति बन जाती है।

वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण की सलाह

कृषि विभाग के अनुसार चूहों पर नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक रणनीति अपनाना जरूरी है, क्योंकि ये स्वभाव से बेहद सतर्क और चालाक होते हैं। सबसे पहले खेत का सर्वे कर सक्रिय बिलों की पहचान करनी चाहिए। शुरुआती दो-तीन दिनों तक बिलों में बिना जहर वाला लोभ चुग्गा डालने की सलाह दी जाती है, ताकि चूहे उसके अभ्यस्त हो सकें।

जहरीले चुग्गे के प्रयोग में सावधानी जरूरी

इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत जहरीली गोलियों का प्रयोग किया जाता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि जहर का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। विष-चुग्गा तैयार करते समय रबर के दस्ताने पहनना, खुले घाव से बचना और हवा की विपरीत दिशा में बैठना जरूरी है। जिन खेतों में जहर डाला गया हो, वहां खतरे का संकेत बोर्ड लगाना चाहिए और पालतू पशुओं को कम से कम एक सप्ताह तक वहां जाने से रोकना चाहिए।

सामूहिक प्रयास से ही संभव है समाधान

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि चूहों का प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब पूरा गांव या मोहल्ला एक साथ मिलकर अभियान चलाए। यदि केवल एक-दो खेतों में नियंत्रण किया गया, तो आसपास के खेतों से चूहे दोबारा आकर बस सकते हैं। गर्मियों का मौसम चूहों के नियंत्रण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान प्राकृतिक भोजन की कमी होती है।

जहर से दुर्घटना की स्थिति में तुरंत उपचार

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि गलती से कोई व्यक्ति या बच्चा जहर खा ले, तो तुरंत प्राथमिक उपचार कर बिना देरी डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। जिंक फास्फाइड जैसे जहर से कुछ ही घंटों में गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी है।

ये भी पढ़ें: गन्ने की पेड़ी से कम लागत में होगा ज्यादा मुनाफा, सही तकनीक बढ़ाएगी उपज

Related posts

Leave a Comment