चंडीगढ़: पंजाब की मंडियों में इस साल गेहूं खरीद का माहौल पहले के मुकाबले काफी अलग नजर आ रहा है। जहां पहले सरकारी एजेंसियों के साथ निजी व्यापारी भी बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदते थे, वहीं इस बार निजी खरीदार बेहद कम दिखाई दे रहे हैं। अब तक कुल खरीदे गए गेहूं में से मात्र 0.22 प्रतिशत ही निजी व्यापारियों और आटा मिल मालिकों द्वारा खरीदा गया है, जिससे साफ है कि लगभग पूरा गेहूं सरकार ही खरीद रही है।
हर साल घटती जा रही निजी खरीद
अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो निजी खरीद में लगातार गिरावट देखी जा रही है। वर्ष 2025 में निजी व्यापारियों ने 8.30 प्रतिशत गेहूं खरीदा था, जबकि 2024 में यह 5.72 प्रतिशत और 2023 में घटकर 3.68 प्रतिशत रह गया था। अब वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बेहद कम हो गया है, जो इस बात का संकेत है कि निजी व्यापारी धीरे-धीरे पंजाब की मंडियों से दूरी बना रहे हैं।
सरकार बनी किसानों का मुख्य सहारा
इस समय मंडियों में करीब 71.58 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जिसमें से 67.34 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। इसमें से 99 प्रतिशत से अधिक गेहूं सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा गया है। निजी व्यापारियों की भागीदारी बेहद सीमित रह गई है, जिससे किसानों के लिए सरकार ही प्रमुख खरीदार बनकर सामने आई है।
दूसरे राज्यों से सस्ता पड़ रहा गेहूं
निजी व्यापारियों के पंजाब से दूरी बनाने का सबसे बड़ा कारण कीमत है। पंजाब में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, जो ढुलाई और अन्य खर्च जोड़ने के बाद लगभग 2695 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाता है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से गेहूं लगभग 2550 रुपये प्रति क्विंटल में उपलब्ध हो रहा है, जिससे व्यापारी सस्ते विकल्प की ओर झुक रहे हैं।
आटा मिलों की जरूरत पहले ही पूरी
पंजाब की आटा मिलों और चक्कियों की सालाना जरूरत लगभग 16.50 लाख मीट्रिक टन है। इस वर्ष कई मिल मालिकों ने पहले ही अन्य राज्यों से अपना स्टॉक खरीद लिया है, जिसके चलते अब उन्हें पंजाब से अधिक खरीद की आवश्यकता नहीं है। यही कारण है कि मंडियों में निजी खरीद काफी कम हो गई है।
आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता
कुछ व्यापारियों का कहना है कि हाल के दिनों में थोड़ी बहुत खरीद में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह पहले जैसी नहीं होगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे सीजन में निजी खरीद 1.5 से 2 प्रतिशत के बीच ही सीमित रह सकती है। यदि अन्य राज्यों में गेहूं महंगा होता है, तो पंजाब से कुछ अतिरिक्त खरीद संभव है, लेकिन बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
योजना के तहत सस्ते गेहूं का इंतजार
कई निजी व्यापारी सरकारी खुला बाजार बिक्री योजना का इंतजार कर रहे हैं, जिसके तहत सरकार सस्ते दरों पर गेहूं उपलब्ध कराती है। पिछली बार इस योजना में गेहूं 2550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिला था, जो पंजाब के समर्थन मूल्य से कम था। यही वजह है कि व्यापारी सीधे मंडियों से खरीदने के बजाय इस योजना का लाभ उठाना पसंद करते हैं।
किसानों पर पड़ सकता है असर
निजी खरीद में कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है। यदि निजी व्यापारी कम खरीदेंगे, तो किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए पूरी तरह सरकार पर निर्भर रहना पड़ेगा। हालांकि समर्थन मूल्य के कारण किसानों को न्यूनतम कीमत मिल रही है, लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने से भविष्य में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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