चंडीगढ़: पंजाब में गेहूं खरीद ने अब तेज गति पकड़ ली है। केंद्र सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों में दी गई राहत के बाद कुछ ही दिनों में खरीद के आंकड़ों में बड़ा उछाल देखने को मिला है, जिससे पहले धीमी पड़ी प्रक्रिया फिर से पटरी पर लौट आई है।
मानकों में ढील से बढ़ी खरीद
मोहाली जिले की डेरा बस्सी अनाज मंडी के दौरे के दौरान हालात की समीक्षा में यह सामने आया कि हाल के दिनों में खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आई है। किसानों ने भी बताया कि अब फसल बेचने में पहले जैसी परेशानी नहीं हो रही है और व्यवस्था अधिक सुचारु हो गई है।
शुरुआती सुस्ती के बाद सुधार
इस बार गेहूं खरीद की शुरुआत धीमी रही थी। 15 अप्रैल तक राज्य में सीमित मात्रा में ही खरीद हो पाई थी, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होने से बड़ी मात्रा में फसल खरीद मानकों से बाहर हो रही थी।
कुछ ही दिनों में कई गुना बढ़ी खरीद
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुणवत्ता मानकों में ढील दी, जिसके बाद खरीद में तेजी आई। 20 अप्रैल तक राज्य में बड़ी मात्रा में गेहूं की आवक हुई और अधिकांश फसल की खरीद पूरी कर ली गई। इससे मंडियों में लंबित फसल तेजी से उठने लगी।
मौसम का पड़ा था असर
मार्च और अप्रैल में हुई बारिश के कारण गेहूं के दानों की चमक और गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। सरकार द्वारा लस्टर लॉस और सिकुड़े दानों की सीमा बढ़ाने से प्रभावित फसल भी खरीद के दायरे में आ गई, जिससे किसानों को राहत मिली।
किसानों का बढ़ा भरोसा
खरीद प्रक्रिया में सुधार के साथ उठान और भुगतान की गति भी बढ़ी है। इससे किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा है। कुल मिलाकर, सरकारी फैसलों और व्यवस्थाओं में सुधार के कारण पंजाब की मंडियों में स्थिति सामान्य होती नजर आ रही है।
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