नई दिल्ली: अगर आप रोज़ाना प्याज खरीदते हैं या बेचते हैं, तो आपने जरूर महसूस किया होगा कि अलग-अलग मंडियों में इसके दामों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। कहीं प्याज बेहद सस्ते दामों पर बिक रहा है, तो कहीं कीमतें अचानक आसमान छू रही हैं। उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए यह उलझन का विषय है कि एक ही राज्य में या पड़ोसी राज्यों में प्याज के दाम में इतना बड़ा अंतर आखिर कैसे हो सकता है। ताजा आंकड़ों पर नज़र डालें तो महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में प्याज की कीमतें 100 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की गई हैं। वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश की मंडियों में भी न्यूनतम और अधिकतम दामों में सैकड़ों रुपये का अंतर है। उदाहरण के तौर पर, महाराष्ट्र की इस्लामपुर मंडी में प्याज की अधिकतम कीमत 2400 रुपये प्रति क्विंटल रही जबकि छत्रपति संभाजीनगर में यही कीमत 250 रुपये तक गिर गई। इसी तरह कामठी मंडी में प्याज का न्यूनतम भाव 1400 रुपये रहा जबकि सोलापुर में यह 100 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों को देखकर यह सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर एक ही फसल के दाम इतने अलग-अलग कैसे हो सकते हैं? इस सवाल का जवाब प्याज के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों ने दिया है। उनका कहना है कि मंडियों में प्याज की कीमत सीधे उसकी गुणवत्ता से जुड़ी होती है। अगर प्याज सड़ चुका है या भंडारण के दौरान खराब हो गया है, तो वह मंडी में बहुत कम कीमत पर बिकता है। दूसरी तरफ अच्छी क्वालिटी वाला प्याज जो सही समय पर मंडी में लाया गया हो और जो देखने में आकर्षक हो, उसकी कीमत कहीं ज़्यादा मिलती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्याज की कीमत तय करने में उसके आकार, नमी की मात्रा, छिलके की मजबूती और ताजगी जैसे कारक अहम भूमिका निभाते हैं। अगर किसान प्याज की खुद छंटाई न करके पूरा स्टॉक एकसाथ मंडी में बेचने के लिए लाते हैं, तो उसमें खराब माल भी शामिल हो जाता है जिससे कीमतें नीचे चली जाती हैं। वहीं व्यापारी जब प्याज की गुणवत्ता को देखता है, तो उसी के अनुसार बोली लगाता है। यही वजह है कि एक ही मंडी में भी न्यूनतम और अधिकतम कीमतों में फर्क होता है।
हरियाणा की मंडियों में भी यही तस्वीर देखने को मिली। फतेहाबाद मंडी में प्याज की अधिकतम कीमत 3000 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि बरवाला में अधिकतम कीमत 1200 रुपये दर्ज की गई। यानी एक ही राज्य में मंडी दर मंडी दाम में दोगुने से भी ज़्यादा का अंतर है। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद मंडी में प्याज की कीमत 1345 से 1430 रुपये के बीच रही, जबकि अकबरपुर मंडी में यह 1280 से 1450 रुपये तक रही।
इन सभी आंकड़ों और विशेषज्ञों की राय से स्पष्ट है कि प्याज की कीमतों में मंडी दर मंडी जो बड़ा अंतर देखने को मिलता है, वह मुख्य रूप से गुणवत्ता, भंडारण की स्थिति और ताजगी पर निर्भर करता है। किसान और व्यापारी अगर प्याज को बेहतर तरीके से स्टोर करें, खराब माल को छांट कर लाएं और सही समय पर मंडी में बेचें, तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी यह समझना ज़रूरी है कि जिस मंडी में प्याज सस्ता मिल रहा है, वहां अक्सर उसकी गुणवत्ता भी वैसी ही होती है। इसलिए जब भी आप प्याज खरीदें या बेचें, तो केवल दाम नहीं बल्कि गुणवत्ता को भी ध्यान में रखें, ताकि खरीदी-बिक्री दोनों में आपको फायदा हो।
