नई दिल्ली: देश के सोयाबीन किसान एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP नहीं मिलने से परेशान हैं। भले ही इस बार सोयाबीन की औसत कीमत पिछले साल के मुकाबले कुछ बेहतर दिखाई दे रही है, लेकिन बढ़ती लागत और मेहनत के हिसाब से यह कीमतें अपर्याप्त साबित हो रही हैं। जनवरी महीने में भी किसानों को मंडियों में MSP का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कई मंडियों में न्यूनतम कीमतें 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की जा रही हैं, जबकि कुछ जगहों पर भाव 1,500 रुपये या 2,000 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे। वहीं, मॉडल रेट भी MSP से नीचे ही चल रहे हैं, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
नवंबर और दिसंबर 2025 में क्या रहे औसत भाव
सरकारी पोर्टल एगमार्कनेट पर उपलब्ध प्राइस ट्रेंड के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 में देशभर में सोयाबीन का थोक औसत भाव 4,707.23 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। दिसंबर 2025 में यह औसत बढ़कर 4,789.18 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचा। हालांकि, यदि तमिलनाडु और मणिपुर जैसे राज्यों में दर्ज असामान्य रूप से ऊंचे भाव को हटा दिया जाए, तो राष्ट्रीय औसत कीमत और नीचे आ जाती है। इस स्थिति में औसत भाव करीब 4,250 रुपये प्रति क्विंटल रह जाता है, जो मौजूदा MSP 5,328 रुपये प्रति क्विंटल से सीधे तौर पर 1,000 से 1,100 रुपये कम है।
प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में कीमतों का हाल
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में दिसंबर 2025 के दौरान कीमतें 4,300 रुपये से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज की गईं। मध्य प्रदेश में औसत भाव 4,300 रुपये प्रति क्विंटल, महाराष्ट्र में 4,383 रुपये और राजस्थान में 4,466 रुपये प्रति क्विंटल रहा। ये सभी कीमतें MSP से करीब 15 से 20 प्रतिशत कम हैं, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
नवंबर के मुकाबले दिसंबर में दिखी हल्की तेजी
नवंबर 2025 के मुकाबले दिसंबर 2025 में कुछ राज्यों में कीमतों में मामूली तेजी जरूर देखने को मिली। कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सोयाबीन के भाव में 1 से 5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, यह तेजी MSP के स्तर तक पहुंचने के लिए नाकाफी रही। बाजार में हल्का सुधार होने के बावजूद किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल सका।
बुवाई और उत्पादन में गिरावट की आशंका
सोयाबीन देश के खाद्य तेल उत्पादन के लिहाज से एक अहम फसल है। खरीफ सीजन 2025 में किसानों ने खरीफ 2024 के मुकाबले सोयाबीन की बुवाई से दूरी बनाई थी। इसके चलते इसके रकबे और कुल उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा, कई राज्यों में फसलों को असमय बारिश और रोग-कीटों से भी नुकसान पहुंचा, जिससे किसानों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ गए।
मध्य प्रदेश में भावांतर योजना से मिली आंशिक राहत
मध्य प्रदेश में इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए भावांतर योजना लागू की। इसके तहत सोयाबीन के मॉडल रेट और MSP के बीच के अंतर की राशि किसानों के खातों में भेजी गई। हालांकि, कई इलाकों में किसान भावांतर योजना से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने सीधे MSP पर खरीद की मांग उठाई है।
महाराष्ट्र में 6,000 रुपये MSP का वादा अधूरा
महाराष्ट्र में महायुति सरकार द्वारा सोयाबीन पर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल MSP देने का वादा अब तक पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में किसान मौजूदा MSP से भी वंचित हैं।
ऐसे में आने वाले खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई पर और असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, मौसम विभाग ने अल-नीनो की स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है, जिससे आगामी मॉनसून सीजन में कम बारिश हो सकती है। इसका असर कुल मिलाकर खरीफ फसलों और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025: जानिए इसमें क्या है ख़ास?
