पशुपालन

12 महीने सस्ता चारा पाना है तो ये बातें जान लें

12 months cheap fodder

नई दिल्ली: दूध की लागत बढ़ने के पीछे हरे चारे की महंगाई और उसकी कमी सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। हालात यह हैं कि गाय-भैंस, भेड़-बकरियों को पौष्टिक और सस्ता हरा चारा न तो आसानी से मिल पा रहा है और न ही सालभर उपलब्ध हो पा रहा है। एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं की बॉडी ग्रोथ, दूध उत्पादन बढ़ाने और दूध की कीमत कम करने में हरे चारे की भूमिका सबसे अहम होती है। अगर पशुपालक साल के 12 महीने सस्ता चारा उपलब्ध कराना चाहते हैं, तो उन्हें अभी से वैज्ञानिक योजना बनानी होगी।

दूध की लागत घटाने की कुंजी है हरा चारा

विशेषज्ञों के अनुसार दूध की लागत को सीधे कम करना मुश्किल है, लेकिन दूध का उत्पादन बढ़ाकर लागत जरूर घटाई जा सकती है। और उत्पादन बढ़ाने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है गुणवत्तापूर्ण हरा चारा। पशुपालकों की सबसे बड़ी समस्या गर्मी और बरसात के मौसम में सामने आती है, जब हरे चारे की भारी कमी हो जाती है। बरसात में स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि कई बार हरा चारा सीधे काटकर पशुओं को खिलाया भी नहीं जा सकता।

फरवरी-मार्च में करें खास तैयारी

फोडर एक्सपर्ट की मानें तो अगर मार्च में सही फसलों की बुवाई कर दी जाए, तो बरसात के मौसम में भी चारे की कमी नहीं होगी। इसके लिए फरवरी से ही तीन प्रमुख हरे चारे की तैयारी शुरू करनी चाहिए। बरसीम, जई और रिजका जैसी चारा फसलों से न सिर्फ पशुओं को पोषण मिलता है, बल्कि इनके बीज बेचकर किसान अतिरिक्त आमदनी भी कर सकते हैं।

चारे की खेती से बीज बेचकर बढ़ेगी आय

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान बरसीम, जई और रिजका की फसल को बीज उत्पादन के लिए तैयार करें, तो अच्छी कमाई संभव है। खासतौर पर गर्मियों में हरे चारे की कमी सबसे ज्यादा होती है, इसलिए मई-जून के लिए मार्च में ही बुवाई जरूरी है। इस दौरान ज्वार, बाजरा, लोबिया और मक्का की बुवाई कर पौष्टिक हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। मार्च में बोई गई फसल मई में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

किसान गोष्ठी में दी गई अहम सलाह

कृषि विज्ञान केंद्र, सदलपुर और गांव ढाणा कलां में आयोजित किसान गोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को यह जानकारी दी। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक किसान मौजूद रहे। किसानों को बताया गया कि चारे की सही योजना से पशुपालन की लागत काफी हद तक कम की जा सकती है।

अगस्त-सितंबर के लिए ऐसे बनाएं साइलेज

एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे से घर पर ही हे और साइलेज बनाना आसान है, बस थोड़ी सी जागरूकता जरूरी है। पतले तने वाली चारा फसल को पकने से पहले काट लें, फिर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सुखाएं। जब नमी 15 से 18 प्रतिशत रह जाए, तब उसे अच्छी तरह पैक कर दें ताकि हवा न लगे। पतले तने वाली फसल जल्दी सूखती है और फंगस का खतरा भी कम रहता है।

सही योजना से सालभर मिलेगा सस्ता चारा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पशुपालक समय पर बुवाई, सही फसल चयन और साइलेज-हे बनाने की तकनीक अपनाएं, तो सालभर हरे चारे की समस्या खत्म हो सकती है। इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि दूध उत्पादन बढ़ेगा और अंततः दूध की लागत भी कम होगी।

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