नई दिल्ली: डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर फीड का इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर पोल्ट्री सेक्टर में फीड के लिए एनर्जी और प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसी वजह से मक्का और सोयामील का उपयोग अधिक किया जाता है, जो कि काफी महंगे होते हैं और किसानों की लागत बढ़ा देते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक इस समस्या का समाधान डीडीजीएस (Distillers Dried Grains with Solubles) हो सकता है, जो फीड की लागत को काफी हद तक कम करने में सक्षम है। डीडीजीएस से उत्पादन डिस्टिलरी में मक्का, गेहूं, चावल और सोया जैसी फसलों से बनने वाले इथेनॉल के दौरान होता है। यह एक पौष्टिक उप-उत्पाद है, जिसे लाइवस्टॉक फीड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कुल फीड खपत का 10 प्रतिशत तक हो सकता है इस्तेमाल
फीड एक्सपर्ट के अनुसार डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में कुल फीड खपत का लगभग 10 प्रतिशत तक डीडीजीएस का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुल डीडीजीएस उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लाइवस्टॉक फीड में लगाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पोल्ट्री सेक्टर को मानकों के अनुसार डीडीजीएस उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खासकर मक्का से बना डीडीजीएस पोल्ट्री फीड में बहुत कम पहुंच पा रहा है। वर्तमान में जो डीडीजीएस इस्तेमाल हो रहा है, उसका बड़ा हिस्सा डेयरी सेक्टर में ही खप रहा है।
हर साल 20 लाख टन डीडीजीएस की जरूरत
कंपाउंड फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के प्रेसिडेंट दिव्य कुमार गुलाटी ने बताया कि अगर डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में 10 प्रतिशत भी डीडीजीएस का इस्तेमाल किया जाए, तो हर साल करीब 20 लाख टन डीडीजीएस की जरूरत होगी। इसमें मक्का और चावल दोनों से बना डीडीजीएस शामिल रहेगा। उन्होंने बताया कि अभी सीमित मात्रा में ही डीडीजीएस डेयरी में इस्तेमाल हो रहा है और बहुत कम मात्रा में चावल से बना डीडीजीएस पोल्ट्री फीड में लगाया जा रहा है।
मानकों की कमी बनी बड़ी बाधा
डीडीजीएस के सीमित उपयोग की बड़ी वजह इसका मानकों के अनुरूप उत्पादन न होना है। पोल्ट्री सेक्टर में इस्तेमाल के लिए एफ्लाटॉक्सिन का स्तर 20 पीपीबी से कम होना जरूरी है। इसके साथ ही नमी का स्तर भी नियंत्रित होना चाहिए।
पोल्ट्री फेडरेशन की मांग
हाल ही में यूपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन और पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच एक बैठक हुई थी। इस बैठक में पीएफआई ने पोल्ट्री फीड में डीडीजीएस के इस्तेमाल पर सैद्धांतिक सहमति जताई, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।
पीएफआई के प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा ने कहा कि मक्का पोल्ट्री फीड का अहम हिस्सा है। अगर डीडीजीएस को पोल्ट्री फीड में शामिल किया जाता है, तो उसके लिए तय मानकों को पूरा करना जरूरी होगा। एफ्लाटॉक्सिन का स्तर 20 पीपीबी से कम और नमी का स्तर 12 प्रतिशत से कम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि ये मानक पूरे किए जाते हैं, तो डीडीजीएस को पोल्ट्री फीड में शामिल करने में कोई समस्या नहीं है। इससे न सिर्फ फीड लागत कम होगी, बल्कि अंडा और चिकन जैसे पोल्ट्री उत्पादों की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
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