कृषि समाचार

जीएसटी काउंसिल द्वारा कृषि क्षेत्र में बड़ा रियायत पैकेज लागू, जानिए फायदे

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जीएसटी काउंसिल की हालिया बैठक में टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव किए हैं। अब GST के 12 और 28 फीसदी स्लैब हटा दिए गए हैं और केवल 5%, 18% और 40% स्लैब ही बचा है। कृषि क्षेत्र की अधिकतर चीजें अब 5% टैक्स स्लैब में आ गई हैं। इस फैसले के बाद किसानों को खेती की लागत कम होने और आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, रासायनिक कीटनाशकों पर 18% GST लागू रहेगा, जबकि बायो-पेस्टिसाइड पर टैक्स घटा दिया गया है।

कृषि यंत्रों पर छूट भी लागू की गई है। ट्रैक्टर अब 1800 सीसी से कम क्षमता वाले मॉडल पर 5% GST में उपलब्ध होंगे, जबकि पहले ये 18% स्लैब में आते थे। इसके साथ ही ट्रैक्टर के टायर, ट्यूब, हाइड्रोलिक पंप और अन्य पुर्जे भी सस्ते होंगे। इससे छोटे किसानों को लाभ मिलेगा और ट्रैक्टर पर खर्च कम होगा।

सिंचाई उपकरणों को भी कम टैक्स दायरे में लाया गया है। 15 एचपी से कम वाले फिक्स्ड स्पीड डीजल इंजन, ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम, कटाई या थ्रेसिंग मशीनरी और कंपोस्टिंग मशीनों पर अब 5% GST लागू होगा। इससे मॉडर्न इरिगेशन तकनीक को अपनाना आसान और किफायती होगा।

उर्वरकों के लिए भी राहत दी गई है। अमोनिया, सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड जैसी कृषि सामग्री पर GST 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे उत्पादन लागत कम होगी और कंपनियां किसानों पर कीमत बढ़ाने का बोझ नहीं डालेंगी। इसके अलावा 12 जैव कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर भी 5% GST लागू होगा।

फल-सब्जी और प्रोसेस्ड फूड में भी टैक्स रियायत दी गई है। अब प्रोसेस्ड फल-सब्जियों पर 5% GST लगेगा, जिससे किसान उत्पादक संगठन और लघु उद्योगों को सीधे फायदा मिलेगा और उनकी आय में सुधार होगा।

डेयरी उत्पादों के लिए भी टैक्स दर घटाई गई है। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले मिल्क और डेयरी प्रोडक्ट्स अब 5% स्लैब में आएंगे, जिससे परिवारों के लिए आवश्यक प्रोटीन और वसा अधिक किफायती हो जाएंगे।

मछली और शहद जैसे जलीय कृषि उत्पादों और प्राकृतिक शहद पर भी 5% GST लागू किया गया है। इससे मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़े ग्रामीण उत्पादकों को लाभ मिलेगा।

सौर ऊर्जा उपकरणों पर भी टैक्स दर घटाई गई है। अब सौर ऊर्जा आधारित उपकरणों पर GST 12% से घटकर 5% हो जाएगा। इसके अलावा, कामर्शियल मालवाहक वाहनों (ट्रक, डिलीवरी वैन आदि) को 28% स्लैब से घटाकर 18% स्लैब में लाया गया है। इन वाहनों की बीमा दर भी 5% स्लैब में कर दी गई है। इससे कृषि उत्पादों की आवाजाही तेज होगी और माल परिवहन में लागत कम होगी।

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