नई दिल्ली: देश में गन्ना किसानों के बढ़ते बकाये और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए भारत सरकार चीनी या गन्ना विकास बोर्ड बनाने पर विचार कर रही है. यह सुझाव भारतीय चीनी मिल संघ (ISMA) की ओर से दिया गया है. ISMA का कहना है कि बोर्ड के गठन से चीनी उद्योग की चुनौतियों को समझने और लंबे समय तक समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी. बोर्ड गठन की यह मांग ऐसे समय में हुई है, जब देशभर की चीनी मिलों पर किसानों के भुगतान बकाये में लगातार इजाफा हो रहा है.
किसानों का भुगतान रुका, 2,000 करोड़ तक पहुंच सकता है बकाया
एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू चीनी सीजन के सिर्फ शुरुआती दो महीनों में ही किसानों के बकाये की राशि तेजी से बढ़ी है. आशंका है कि यह रकम 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. ऐसे में बकाये की समस्या के सही समाधान के लिए इस्मा ने सरकार के सामने चीनी या गन्ना बोर्ड बनाने की मांग रखी है. भुगतान में देरी इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि सरकार ने हाल ही में इथेनॉल डायवर्जन बढ़ाने और निर्यात मंजूरी जैसे फैसले लिए हैं, जिनसे मिलों की कमाई में इजाफा होना तय है.
चीनी मिलों की आय बढ़ाने के लिए MSP बढ़ाने की तैयारी
किसानों के बकाये के बीच सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य यानी MSP में बदलाव की तैयारी कर रही है. खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने संकेत देते हुए कहा है कि सरकार एक महीने के भीतर चीनी के MSP और अन्य राहत उपायों पर फैसला कर सकती है. सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि चीनी मिल उद्योग की आय बढ़े और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो. ISMA की वार्षिक बैठक के दौरान चोपड़ा ने कहा कि जनवरी मध्य से बकाये की समस्या और उभर सकती है, इसलिए सरकार इससे पहले ही उपाय लागू करने की दिशा में काम कर रही है.
MSP बढ़ाने और निर्यात-इथेनॉल आवंटन पर चर्चा
सरकार ने कहा है कि सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिसमें चीनी MSP बढ़ाना, मौजूदा 15 लाख टन से अधिक निर्यात मंजूरी देना और अधिक इथेनॉल आवंटन शामिल है. MSP फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि गन्ने की खरीद कीमत हर साल बढ़ रही है. ISMA ने MSP को पूरे देश की औसत लागत के अनुरूप 41.66 रुपये प्रति किलो तक बढ़ाने की मांग की है.
गन्ना विकास बोर्ड बनाने के सुझाव पर सरकार ने दी प्रतिक्रिया
गन्ना विकास बोर्ड के गठन पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद्य सचिव चोपड़ा ने कहा कि वह इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं, लेकिन चूंकि यह निर्णय कृषि मंत्रालय से जुड़ा है, इसलिए औपचारिक प्रस्ताव मिलने पर इस पर चर्चा आगे बढ़ेगी. उन्होंने यह भी कहा कि गन्ना और चीनी उत्पादन के साथ-साथ रिकवरी रेट में सुधार जरूरी है, क्योंकि अधिक उत्पादन होने पर सरप्लस स्टॉक जमा होने की आशंका बढ़ सकती है.
चीनी उत्पादन बढ़ने से दबाव में उद्योग, बकाया बढ़ने का खतरा
ISMA के अनुसार, दिसंबर तक दिखाई देने वाला बकाया सिर्फ महाराष्ट्र का है, जबकि उत्तर प्रदेश की मिलें अभी कुछ सप्ताह पहले ही शुरू हुई हैं. नियमों के अनुसार, चीनी मिलों को किसानों को 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, जिसके बाद देरी बकाये के रूप में दर्ज होती है. इस बार चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी के चलते मिलों पर स्टॉक जमा होने का दबाव बढ़ा है, साथ ही घरेलू बाजार की कीमतें भी गिरी हैं, जिससे फंडिंग पर असर पड़ा है.
चीनी उत्पादन में तेजी, इथेनॉल डायवर्जन भी बढ़ेगा
कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन 343 लाख टन तक रहने की संभावना है. मौजूदा समय में सिर्फ 28 प्रतिशत चीनी इथेनॉल डायवर्जन व्यवस्था में शामिल है, जिससे लगभग 34 लाख टन अतिरिक्त चीनी इथेनॉल के लिए भेजी जाएगी. सरकार चाहती है कि मौजूदा सीजन में स्टॉक जमा होने से रोका जाए और किसानों को समय पर भुगतान मिले.
2018-19 जैसा संकट दोहराने से बचने पर फोकस
ISMA के डायरेक्टर-जनरल दीपक बल्लानी ने कहा कि मौजूदा स्थिति 2018-19 सीजन जैसी नजर आ रही है, जब बकाया 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. उस समय भी MSP में बढ़ोतरी की गई थी और सरकार ने मिलों को एक्सपोर्ट में प्रोत्साहन दिया था. नए अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि अगर MSP बढ़ती है तो बाजार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि खुदरा कीमतों में अधिकतम 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी ही होने की संभावना है.
ये भी पढ़ें: AI की मदद से 13 राज्यों में किसानों ने बदला खरीफ 2025 का खेती पैटर्न
