करनाल: देश में जौ की खेती को नई दिशा देने वाली बड़ी सफलता सामने आई है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने छिलका रहित जौ की नई किस्में विकसित की हैं, जो अब सीधे खाने और उपयोग में लाई जा सकेंगी। यह पहल न केवल किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी, बल्कि उपभोक्ताओं के बीच भी इस अनाज की मांग बढ़ा सकती है।
37 साल बाद मिली बड़ी उपलब्धि
वैज्ञानिकों ने करीब 37 साल बाद इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। नई किस्मों में ऐसी विशेषताएं हैं जो जौ को गेहूं की तरह आसान उपयोग योग्य बनाती हैं। इससे पहले जौ के छिलके के कारण इसे इस्तेमाल करना कठिन माना जाता था, जिससे इसकी लोकप्रियता कम हो गई थी।
गेहूं की तरह होगा उपयोग
नई विकसित छिलका रहित जौ की किस्म ऐसी है, जिसे बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के सीधे आटा या अन्य खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं के लिए इसे अपनाना आसान होगा और बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ सकती है।
कम समय में बेहतर उत्पादन
यह किस्म कम समय में तैयार हो जाती है और किसानों को बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ मुनाफा बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
सेहत के लिए फायदेमंद
नई जौ की किस्म पोषण से भरपूर है और इसमें ऐसे तत्व मौजूद हैं जो शरीर के लिए लाभकारी माने जाते हैं। यह मधुमेह, हृदय और अन्य बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। साथ ही यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी सहायक है।
किसानों के लिए नया अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच यह किस्म किसानों के लिए आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है। बाजार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ रही है, ऐसे में यह जौ किसानों को बेहतर कीमत दिला सकती है।
खेती में बढ़ेगा जौ का महत्व
इस नई किस्म के आने से जौ की खेती को बढ़ावा मिलेगा और यह अनाज एक बार फिर भारतीय खेती और भोजन का अहम हिस्सा बन सकता है। किसानों के लिए यह एक स्थायी और लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रहा है।
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