खेती-किसानी

लौकी की खेती करने वाले किसानों के लिए वरदान है ये किस्म

This variety is a boon for gourd farmers

नई दिल्ली: सब्जी बाजार में एक ऐसी फसल है जिसकी मांग साल भर बनी रहती है और जिसकी खेती किसान हर मौसम में कर सकते हैं। यह फसल है लौकी। गर्मी हो या बारिश, लौकी की खेती पूरे भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है, और अब इसमें किसानों को नई किस्मों की बदौलत अधिक उत्पादन और मुनाफा भी मिल रहा है। लौकी एक कद्दू वर्गीय फसल है और इसकी खेती जायद, खरीफ और रबी तीनों ही मौसमों में की जाती है। इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण यह है कि यह सालों भर उगाई जा सकती है और बाजार में इसकी खपत लगातार बनी रहती है। यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में किसान इसे नकदी फसल के रूप में बड़े पैमाने पर उगा रहे हैं। लेकिन किसानों के लिए खेती की शुरुआत से पहले सबसे बड़ा सवाल होता है – कौन सी किस्म चुनी जाए जिससे अच्छी उपज मिले और फसल नुकसान से भी बचे? ऐसे में किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) की ओर से विकसित की गई PSPL वैरायटी किसी वरदान से कम नहीं है।

PSPL वैरायटी: कम लागत में अधिक मुनाफे वाली लौकी की किस्म

PSPL किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तेजी से पकने वाली किस्म है और इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं जिनकी लंबाई 40 से 50 सेंटीमीटर तक होती है। यह किस्म खरीफ सीजन में विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है। इसके साथ ही यह घरेलू उपयोग के लिए भी आदर्श है। उत्पादन की बात करें तो यह किस्म प्रति हेक्टेयर 400 से 425 क्विंटल की औसत उपज देती है, जो सामान्य किस्मों की तुलना में काफी अधिक है। यही वजह है कि इसे किसानों में तेजी से लोकप्रियता मिल रही है।

सिर्फ 22 रुपये में मिल रहा बीज

किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) ने इस किस्म के बीजों की ऑनलाइन बिक्री शुरू की है। 15 ग्राम बीज का पैकेट केवल 22 रुपये में निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध है। किसान चाहें तो इसे घर बैठे ऑर्डर कर सकते हैं और खेती के लिए खेतों या घर की छत पर भी इस बीज को बो सकते हैं।

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तैयारी

लौकी की अच्छी उपज के लिए 18 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त माना जाता है। यह फसल अधिक पाले को सहन नहीं कर सकती, इसलिए हल्के गर्म और नम मौसम में इसकी बुआई अधिक लाभकारी होती है। खेत की तैयारी में किसानों को पहले अच्छी तरह से जैविक खाद या खाद का मिश्रण खेत में बिखेरना चाहिए, फिर दोबारा जुताई कर बीज की बुआई करनी चाहिए। यदि यह प्रक्रिया सही तरीके से की जाए, तो किसान अपेक्षाकृत बेहतर उत्पादन और मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है लौकी की मांग?

आज के समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के कारण लौकी जैसी फसलों की मांग तेजी से बढ़ी है। लौकी को न केवल एक दैनिक आहार के रूप में अपनाया जा रहा है, बल्कि इसका उपयोग जूस और औषधीय प्रयोजनों में भी किया जा रहा है। ऐसे में बाजार में इसकी कीमत स्थिर बनी रहती है, जो किसानों के लिए एक स्थायी आमदनी का जरिया बनती जा रही है।

लौकी की खेती अब पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ चुकी है और किसान आधुनिक किस्मों जैसे PSPL वैरायटी की मदद से कम लागत, अधिक उपज और बेहतर लाभ की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। मॉनसून की अच्छी संभावना के बीच यदि किसान सही समय पर बुआई करें और उन्नत तकनीकें अपनाएं, तो लौकी की खेती से उन्हें इस सीजन में अच्छी कमाई हो सकती है।

ये भी पढ़ें: लोबिया की खेती करने वाले किसानों के लिए ये किस्म है बेहतरीन

Related posts

Leave a Comment