नई दिल्ली: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में कपास प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। गर्मी शुरू होते ही किसान खेतों की तैयारी और कपास की बुआई में जुट जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त सिंचाई सुविधा होने पर मई और जून में भी कपास की बुआई की जा सकती है। अच्छी पैदावार के लिए बुआई का समय, मिट्टी की स्थिति, बीज की गुणवत्ता और पोषक तत्वों का संतुलित प्रबंधन बेहद जरूरी है।
कपास की बुआई के लिए ऐसे तैयार करें खेत
कपास की अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाने के बाद जीवांश युक्त खाद मिलाने से फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है। कपास लगभग हर प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है, लेकिन जल निकासी अच्छी होना जरूरी है। रेतीली, अत्यधिक लवणीय और पानी रोकने वाली सेम मिट्टी को कपास के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। सीड-कम-फर्टी ड्रिल या प्लांटर मशीन से बुआई करने पर समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
बुआई से पहले बीज उपचार जरूरी
कपास की बुआई से पहले बीज उपचार करना जरूरी है, क्योंकि इससे शुरुआती अवस्था में फसल को रोगों और कीटों से बचाने में मदद मिलती है। एक किलोग्राम बीज के लिए 2 से 5 ग्राम कार्बेन्डाजिम या कैप्टान से उपचार किया जा सकता है। रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए बीज पर 7 ग्राम इमिडाक्लोप्रिड या 20 ग्राम कार्बोसल्फान का प्रयोग किया जाता है। दीमक से बचाव के लिए 10 लीटर पानी में 10 मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफॉस मिलाकर बीज पर छिड़काव करने और इसके बाद बीज को करीब आधे घंटे तक छांव में सुखाने की सलाह दी जाती है।
किस्म के अनुसार रखें बीज की मात्रा और दूरी
उत्तर भारत में कपास की कई संकर और देसी किस्मों की खेती की जाती है। संकर किस्मों में लक्ष्मी, एचएस 45, एचएस 6, एलएच 144, एफ 1378 और एफ 846 प्रमुख हैं। देसी किस्मों में एच 777, एचडी 1, एच 974, एचडी 107 और एलडी 327 जैसी किस्में शामिल हैं। संकर कपास के लिए प्रति हेक्टेयर करीब 4 से 5 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है, जबकि देसी किस्मों के लिए 10 से 12 किलोग्राम और अमेरिकन कपास के लिए 15 से 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। देसी और अमेरिकन कपास में पौधे से पौधे की दूरी करीब 60 गुणा 30 सेंटीमीटर, जबकि संकर किस्मों में 90 गुणा 40 सेंटीमीटर रखना उचित माना जाता है।
संतुलित पोषण से मजबूत होंगे पौधे
कपास में उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना सबसे बेहतर रहता है। यदि मिट्टी परीक्षण उपलब्ध नहीं है, तो सामान्य परिस्थितियों में देसी किस्मों के लिए 50 से 70 किलोग्राम नाइट्रोजन और 20 से 30 किलोग्राम फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। अमेरिकन कपास में पोषक तत्वों की आवश्यकता इससे कुछ अधिक हो सकती है। संकर कपास में अच्छी पैदावार के लिए करीब 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर दिया जा सकता है। इसके साथ 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर देने से भी फसल की बढ़वार और पौधों की मजबूती में लाभ मिल सकता है।
सही समय और तकनीक से बढ़ेगी पैदावार
कपास की बुआई के समय खेत की स्थिति, सिंचाई सुविधा और स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना जरूरी है। किसानों को पारंपरिक अनुभव के साथ वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाना चाहिए। सही बीज, उचित बीज उपचार, संतुलित पोषण, उचित पौध दूरी और समय पर बुआई से फसल की उत्पादकता बेहतर की जा सकती है। खेती में समय पर लिया गया सही निर्णय न केवल उत्पादन बढ़ा सकता है, बल्कि कीट और रोगों से होने वाले नुकसान को भी कम करने में मदद कर सकता है।
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