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राजस्थान सरकार बहुत जल्द इन राज्यों में खोलेगी सरस डेयरी के आउटलेट्स

Rajasthan Government

जयपुर: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। जल्द ही इन राज्यों में राजस्थान का प्रसिद्ध सरस घी, दही, पनीर और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां आसानी से उपलब्ध होंगी। राजस्थान सरकार की डेयरी ब्रांड सरस तीनों राज्यों में अपने आउटलेट खोलने की तैयारी कर रही है। इस योजना पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी विधानसभा में बजट 2026-27 के दौरान पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने दी।

सरस डेयरी को मिले 2000 करोड़ रुपये

राज्य में दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने सरस डेयरी को 2 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। मंत्री ने बताया कि इसका उद्देश्य सरस को एक गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहले से ही अमूल, मदर डेयरी और हरियाणा की वीटा डेयरी सक्रिय हैं। हाल ही में पंजाब की वेरका डेयरी ने भी अपनी शुरुआत की है। ऐसे में सरस की एंट्री से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे।

पशुपालकों को मिलेगा प्रति लीटर 5 रुपये अनुदान

राजस्थान सरकार द्वारा बजट में राज्य के करीब 5 लाख पशुपालकों को बड़ी राहत दी गई है। उन्हें प्रति लीटर दूध पर 5 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना पर सरकार लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च करेगी। साथ ही एक लाख पशुपालकों को दूध से मिठाई, पनीर, घी और मावा जैसे उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रोसेसिंग क्षमता 52 लाख से बढ़कर 2 करोड़ लीटर

राजस्थान में दुग्ध प्रोसेसिंग क्षमता को वर्ष 2047 तक 52 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 2 करोड़ लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री के लिए केंद्रों की संख्या 27 हजार से बढ़ाकर एक लाख करने का प्रस्ताव है। इसके तहत एक हजार नए मिल्क कलेक्शन सेंटर और 500 नए डेयरी बूथ खोले जाएंगे।

नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट होंगे स्थापित

अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिस पर 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बारां और सिरोही में 50-50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट को भी और अधिक सक्षम बनाया जाएगा।

200 नए पशु चिकित्सा उपकेंद्र खुलेंगे

प्रदेशभर में अगले दो वर्षों में 200 नए पशु चिकित्सा उपकेंद्र खोले जाएंगे। इसके अलावा 25 उपकेंद्रों को पशु चिकित्सालय और 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में उन्नत किया जाएगा।

गोशालाओं और महिला समूहों को प्रोत्साहन

प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। गो-उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चितौड़गढ़, सिरोही, जालोर और पाली जिलों में 35 महिला शक्ति पोल्ट्री समूह बनाए जाएंगे। प्रत्येक समूह को 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। यह बजट प्रावधान पशुपालन, डेयरी और सहकारी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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