खेती-किसानी

पंजाब-हरियाणा के किसान देरी से धान रोपाई के लिए चुनें ये उन्नत किस्में

Punjab Paddy Farming

चंडीगढ़: देश के अधिकांश राज्यों में खरीफ मौसम की प्रमुख फसल धान की रोपाई शुरू हो चुकी है। पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में भी किसान तेजी से रोपाई कर रहे हैं। हालांकि, कई किसान विभिन्न कारणों से समय पर रोपाई नहीं कर पाए हैं। ऐसे किसानों के लिए कम अवधि में तैयार होने वाली पछेती धान की उन्नत किस्में बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इन किस्मों की खेती से कम समय में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है और अगली फसल की तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है।

देरी से रोपाई के लिए उपयुक्त पांच उन्नत किस्में

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पंजाब और हरियाणा के किसान पछेती रोपाई के लिए कई उन्नत धान किस्मों का चयन कर सकते हैं।

  • पहली किस्म पीआर 131 है, जो लगभग 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके दाने अच्छी गुणवत्ता वाले होते हैं और पौधे मजबूत होने के कारण गिरने की संभावना कम रहती है। उचित प्रबंधन के साथ इससे लगभग 31 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
  • बासमती 1509 भी पछेती रोपाई के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है। यह सुगंधित किस्म लगभग 115 से 125 दिनों में तैयार होती है। इसकी विशेषता यह है कि कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और बाजार के साथ-साथ निर्यात में भी इसकी अच्छी मांग रहती है। इससे लगभग 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है।
  • पीआर 136 भी कम अवधि में पकने वाली प्रमुख किस्मों में शामिल है। यह लगभग 125 से 130 दिनों में तैयार होती है और पानी की बचत में भी सहायक मानी जाती है। इसके लंबे और गुणवत्तापूर्ण दानों के कारण किसानों को अच्छा मूल्य मिलने की संभावना रहती है। इसकी औसत पैदावार 26 से 28 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है।
  • पूसा बासमती 1692 भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह किस्म लगभग 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है और अन्य किस्मों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। इसके लंबे और सुगंधित दानों के कारण बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। इसकी औसत पैदावार 20 से 24 क्विंटल प्रति एकड़ तक बताई जाती है।
  • पीआर 128 भी पछेती रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म मानी जाती है। यह लगभग 111 दिनों में तैयार हो जाती है और कई प्रमुख रोगों के प्रति सहनशील मानी जाती है। उचित पोषण और सिंचाई प्रबंधन के साथ इससे लगभग 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन लिया जा सकता है।

पछेती धान की खेती में रखें इन बातों का ध्यान

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पछेती धान की खेती में सही समय पर रोपाई, संतुलित पोषण प्रबंधन और समय पर रोग नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। किसानों को बीज उपचार के बाद ही पौध तैयार करनी चाहिए, ताकि शुरुआती अवस्था में रोगों का खतरा कम हो सके। इसके अलावा खेत में आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई करनी चाहिए और पानी की बचत के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहिए। इससे उत्पादन लागत कम होती है और जल संरक्षण में भी मदद मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और जलवायु की चुनौतियों के बीच कम अवधि में तैयार होने वाली इन उन्नत धान किस्मों का चयन किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। यदि वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए और उचित प्रबंधन अपनाया जाए, तो किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

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