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लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर की स्थापना से बागवानी क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

Clean Plant Center Lucknow

लखनऊ: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन के वैचारिकी सभागार में उत्तर प्रदेश के कृषि रोडमैप, विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की संयुक्त समीक्षा बैठक की। इस बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

कृषि और ग्रामीण विकास को लेकर व्यापक समीक्षा

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में तेज़ी से आगे नहीं बढ़ेगा, तब तक विकसित भारत का लक्ष्य पूरी तरह साकार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में कृषि, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य अब विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। हालांकि, बदलती परिस्थितियों और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए कृषि क्षेत्र में और अधिक गंभीर एवं दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।

विकसित कृषि रोडमैप पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, लाभकारी और तकनीक आधारित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कृषि विविधीकरण, आधुनिक तकनीकों के विस्तार, मूल्य संवर्धन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना में वर्ष दो हजार सैंतालीस तक कृषि क्षेत्र के समग्र विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया गया। इसमें जलवायु अनुकूल कृषि, विज्ञान आधारित खेती, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और कृषि विविधीकरण को प्रमुख आधार बताया गया।

कृषि अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का लक्ष्य

कार्ययोजना के अनुसार उत्तर प्रदेश की कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वर्तमान अर्थव्यवस्था को वर्ष दो हजार सैंतालीस तक कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विकास दर को बढ़ाकर पांच दशमलव एक चार प्रतिशत तक ले जाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस योजना में केवल उत्पादन वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय सुधारने, मूल्य संवर्धन और निर्यात क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही धान और गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता कम कर दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का और बागवानी फसलों के विस्तार पर बल दिया जाएगा।

किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फोकस

कृषि विकास को नए आयाम देने के लिए फल, सब्जी, पुष्प उत्पादन, मधुमक्खी पालन, कृषि वानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन को प्रमुख विकास इंजन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही कृषि प्रसंस्करण इकाइयों, शीत भंडारण, पैक हाउस, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं और निर्यात अवसंरचना के विस्तार की आवश्यकता बताई गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी और सभी आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं और रोडमैप उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं।

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