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एग्रीस्टैक से 10.31 करोड़ किसानों को मिली डिजिटल पहचान

AgriStack provides digital identity

नई दिल्ली: देश में कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण को तेजी से आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने अब तक 10.31 करोड़ से अधिक किसानों को किसान पहचान संख्या जारी कर दी है। एग्रीस्टैक और डिजिटल कृषि मिशन के तहत तैयार की जा रही इस व्यवस्था से किसानों की भूमि, फसल और कृषि गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एकीकृत डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध होगी। इससे सरकारी योजनाओं, कृषि ऋण, फसल बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ किसानों तक अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचाने में मदद मिलेगी।

एग्रीस्टैक से तैयार होगी किसानों की डिजिटल प्रोफाइल

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि एग्रीस्टैक किसान केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा है। इसे किसानों को आसान, तेज और प्रभावी कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक किसान की व्यापक डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, भूमि रिकॉर्ड, बोई गई फसलों, पशुधन और मत्स्य पालन जैसी कृषि संपत्तियों से संबंधित विवरण शामिल किए जाएंगे।

तीन प्रमुख व्यवस्थाओं पर आधारित है एग्रीस्टैक

एग्रीस्टैक के तहत किसान रजिस्ट्री, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और फसल बोआई रजिस्ट्री को प्रमुख आधार बनाया गया है। इन रिकॉर्ड का रखरखाव संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाएगा। किसान पहचान संख्या को किसानों के डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। इससे किसान की पहचान और भूमि स्वामित्व का डिजिटल सत्यापन अधिक आसान और प्रभावी हो सकेगा।

10.31 करोड़ से अधिक किसान पहचान संख्या जारी

सरकार के अनुसार 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान पहचान संख्या तैयार की जा चुकी हैं। मणिपुर ने भी डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान पहचान संख्या तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। किसान पहचान संख्या के माध्यम से किसानों से संबंधित विभिन्न जानकारियों को एकीकृत करने में मदद मिलेगी। इससे योजनाओं के लिए पात्र किसानों की पहचान और उन्हें सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

ऋण और फसल बीमा की सुविधा होगी आसान

किसान रजिस्ट्री को विभिन्न किसान केंद्रित योजनाओं और डिजिटल मंचों से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि ऋण के वितरण में तेजी लाना, फसल बीमा तक पहुंच आसान करना, मौसम आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराना और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। सरकार का मानना है कि एकीकृत किसान आंकड़ा व्यवस्था से कृषि सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

31.3 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल फसल सर्वेक्षण

डिजिटल कृषि मिशन के तहत रबी 2025-26 मौसम में देश के 648 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण कराया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान 31.3 करोड़ से अधिक खेतों को शामिल किया गया। इस व्यवस्था से खेतों में बोई गई फसलों, खेती के क्षेत्र और संभावित उत्पादन से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से जुटाने में मदद मिलेगी। इससे कृषि उत्पादन के अनुमान को बेहतर बनाने और सरकारी योजनाओं के लिए अधिक सटीक आंकड़े तैयार करने में भी सहायता मिल सकती है।

किसानों के आंकड़ों की सुरक्षा पर सरकार का जोर

केंद्र सरकार ने किसानों के आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी है। सरकार के अनुसार एग्रीस्टैक को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के अनुरूप विकसित किया गया है।

सहमति के आधार पर होगा आंकड़ों का उपयोग

किसानों की सहमति से ही उनके आंकड़े एकत्र करने, आंकड़ों के उपयोग पर किसान का नियंत्रण बनाए रखने और सुरक्षित तरीके से आंकड़ों को संग्रहित करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा केवल अधिकृत प्रणालियों को ही आंकड़ों तक पहुंच देने और साइबर सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन करने की व्यवस्था भी शामिल है। राज्य किसान रजिस्ट्री का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों के पास रहेगा, जबकि केंद्र सरकार आवश्यक तकनीकी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी।

फसल उत्पादन के आकलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल

फसल बीमा योजना के तहत संचालित तकनीक आधारित उपज आकलन व्यवस्था में धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों के उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन आधारित तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल सामान्य फसल अनुमान प्रणाली भी विकसित की गई है। इसका उद्देश्य फसल उत्पादन के अधिक सटीक और समयबद्ध अनुमान तैयार करना है।

कृषि व्यवस्था के लिए डिजिटल आधार बनेगा एग्रीस्टैक

केंद्र सरकार का मानना है कि एग्रीस्टैक और किसान रजिस्ट्री आने वाले समय में भारतीय कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बन सकते हैं। किसानों की भूमि, फसल और कृषि गतिविधियों से संबंधित जानकारी एकीकृत होने से योजनाओं की पहुंच बढ़ाने, सेवाओं के वितरण को तेज करने और कृषि प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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