जयपुर: फूल हमेशा से मानव जीवन और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। आधुनिक समय में भी फूलों की मांग और उपयोग लगातार बढ़ रहा है। गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है और त्योहारों, विवाह समारोहों, क्रिसमस, वैलेंटाइन डे तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के कारण सितंबर से मार्च के बीच इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में गुलाब की खेती किसानों के लिए बेहतर आय का माध्यम बन सकती है, लेकिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके उत्पादन में और विस्तार की आवश्यकता है।
बढ़ती मांग के बीच गुलाब उत्पादन बढ़ाने की जरूरत
वैलेंटाइन डे के दौरान फूलों का कारोबार अपने चरम पर पहुंच जाता है और गुलाब उत्पादक किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद रहती है। पिछले कुछ वर्षों में गुलाब की कीमतों में मजबूती देखी गई है। भारतीय और विदेशी उपभोक्ताओं के बीच भारतीय गुलाब की बढ़ती लोकप्रियता के कारण घरेलू बाजार के साथ निर्यात बाजार में भी इसकी संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण फूलों की खेती करने वाले किसानों और उद्यमियों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित करता है। निर्यात बाजार से जुड़ने वाले उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना रहती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फूलों का बाजार हर वर्ष 15 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रहा है।
डच गुलाब की खेती में बेहतर मुनाफे की संभावना
डच गुलाब को मुख्य रूप से कट फ्लावर के रूप में पॉलीहाउस में उगाया जाता है। इसकी खेती में नियंत्रित वातावरण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। तने की लंबाई और कली का आकार इसकी कीमत निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जितना लंबा तना और बड़ा फूल होगा, बाजार में उसकी कीमत उतनी ही अधिक मिलने की संभावना रहती है।
निर्यात बाजार में भारतीय गुलाब की बड़ी संभावनाएं
डच गुलाब अत्यधिक जल्दी खराब होने वाला उत्पाद है, इसलिए इसकी कटाई से लेकर बाजार तक पहुंचने के दौरान तापमान नियंत्रित रखना जरूरी होता है। निर्यात के लिए शीत श्रृंखला व्यवस्था, प्रशीतित वाहनों और हवाई माल परिवहन का उपयोग किया जाता है।
वैलेंटाइन डे के लिए गुलाब का निर्यात सामान्यतः जनवरी के अंतिम सप्ताह से फरवरी के शुरुआती दिनों के बीच अधिक होता है। पुणे और बेंगलुरु के आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गुलाब की डंडियां यूरोप, जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में भेजी जाती हैं। दिल्ली, पुणे और बेंगलुरु के हवाई माल परिवहन केंद्र इसके प्रमुख माध्यम हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी कम
नीदरलैंड में दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय फूल नीलामी केंद्र है, जहां भारत के फूलों की भी नीलामी होती है। ब्रिटेन, जर्मनी और यूरोप के कई अन्य देशों में डच गुलाब समेत विभिन्न प्रकार के फूलों की मांग है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी एक प्रतिशत से भी कम है। इससे स्पष्ट है कि भारतीय किसानों और फूल निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
घरेलू बाजार में भी लगातार बढ़ रही मांग
भारतीय समाज में समय के साथ फूलों के उपयोग का दायरा बढ़ा है। बैठक, जन्मदिन, विवाह समारोह, वर्षगांठ और विदाई जैसे अवसरों पर गुलदस्ते देना अब आम हो गया है। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक फूलों की दुकानें आसानी से देखने को मिलती हैं।
गुलदस्तों में गुलाब का विशेष स्थान है। लाल गुलाब को प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है और वैलेंटाइन सप्ताह के दौरान इसकी मांग सबसे अधिक रहती है। इसी वजह से घरेलू बाजार में कट फ्लावर के रूप में डच गुलाब की मांग लगातार बढ़ रही है और कई बार बाजार में इसकी कमी भी देखने को मिलती है।
अनुबंध खेती से किसानों को मिल रहा तकनीकी सहयोग
अच्छे मुनाफे की संभावना को देखते हुए देश में सुरक्षित वातावरण में गुलाब की खेती का क्षेत्र बढ़ रहा है। कई किसान अनुबंध के आधार पर डच गुलाब की खेती कर रहे हैं। फूलों का निर्यात करने वाली कंपनियां किसानों के साथ खरीद समझौते कर उन्हें तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करा रही हैं। आधुनिक उत्पादन तकनीकों के साथ फसल में फूल आने के समय को बाजार की मांग के अनुसार नियंत्रित करने जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इससे किसानों को निर्यात बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन करने में मदद मिल सकती है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ सकता है गुलाब का उत्पादन
फूलों की खेती से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में गुलाब उत्पादन का दायरा बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है। पॉलीहाउस, मौसम के अनुकूल किस्मों का चयन और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन जैसी तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि की जा सकती है।
किसानों को प्रशिक्षण और सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत
फूलों की खेती में किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए महाराष्ट्र के पुणे स्थित मावल और राजस्थान के जयपुर स्थित दुर्गापुरा के उद्यान प्रशिक्षण एवं नवाचार केंद्रों जैसे संस्थानों की सहायता ली जा सकती है। डॉ. राजेश सैनी (इंटरनेशनल ट्रेनर और IHITC के पूर्व एक्टिंग जॉइंट डायरेक्टर – टेक्निकल) के अनुसार, हम नई तकनीकों (जैसे पॉली हाउस, हमारे मौसम और बाजार की मांग के हिसाब से नई किस्मों को चुनना और अपनाना) को अपनाकर और किसानों को उसी के अनुसार ट्रेनिंग देकर भारत में गुलाब की खेती का दायरा बढ़ा सकते हैं।
ट्रेनिंग के लिए HTC (हॉर्टिकल्चर ट्रेनिंग सेंटर) मावल, पुणे (महाराष्ट्र) और HITC (इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर इनोवेशन एंड ट्रेनिंग सेंटर) दुर्गापुरा, जयपुर (राजस्थान) से संपर्क किया जा सकता है। राज्य और केंद्र सरकार को युवा उद्यमियों, प्रगतिशील किसानों, हॉर्टिकल्चर एक्सटेंशन अधिकारियों और वैज्ञानिकों को टारगेट, सही प्रमोशन, ट्रेनिंग, क्लस्टर बनाने, इनाम/अवॉर्ड और सब्सिडी देकर प्रोत्साहित करना चाहिए। इसमें एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर, कृषि विज्ञान केंद्र, हॉर्टिकल्चर विभाग, अलग-अलग एग्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन में सैटेलाइट ट्रेनिंग सेंटर बनाना और फ्लोरिकल्चर एक्सपर्ट्स व NGO के अनुभव का इस्तेमाल करना अहम भूमिका निभा सकता है।
राज्य और केंद्र सरकार को युवा उद्यमियों, प्रगतिशील किसानों, उद्यान विस्तार अधिकारियों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन, समूह आधारित खेती, पुरस्कार और अनुदान जैसी सुविधाओं के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहिए। कृषि अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों, उद्यान विभाग और विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्रों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
गुलाब की खेती में रोजगार और निर्यात की बड़ी संभावना
गुलाब की लगातार बनी रहने वाली मांग इसे किसानों के लिए महत्वपूर्ण व्यावसायिक फूल फसल बनाती है। धार्मिक स्थलों से लेकर विवाह समारोहों और निजी आयोजनों तक इसका व्यापक उपयोग होता है। देश में डच गुलाब की लोकप्रियता बढ़ने के साथ घरेलू बाजार और निर्यात दोनों में इसके विस्तार की संभावनाएं मजबूत हैं।
यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, बाजार की सही जानकारी, प्रशिक्षण, शीत श्रृंखला और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो भारत गुलाब उत्पादन और निर्यात में अपनी अंतरराष्ट्रीय हिस्सेदारी को काफी बढ़ा सकता है। गुलाब की बढ़ती मांग को देखते हुए अब जरूरत केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि गुणवत्ता और बाजार आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने की भी है।
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