पशुपालन

बरसात में पशुओं की साफ-सफाई और खुराक पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी

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करनाल: बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए विशेष सावधानी बरतने का समय होता है। इस दौरान नमी और गंदगी बढ़ने से पशुओं में संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि गाय और भैंस का दूध निकालते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही दूध देने वाले पशुओं को संतुलित आहार और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना भी जरूरी है। बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है।

दूध उत्पादन के दौरान बढ़ जाती है पोषण की आवश्यकता

विशेषज्ञों के अनुसार, दूध देने के बाद पशुओं के शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण तत्वों की कमी होने लगती है। यही कारण है कि कई बार दूध निकालने के तुरंत बाद पशु जमीन पर बैठ जाता है, जो उसकी कमजोरी का संकेत हो सकता है। ऐसे समय में संतुलित खुराक और खनिज तत्वों की पर्याप्त मात्रा देना बेहद जरूरी होता है। बरसात के मौसम में संक्रमण तेजी से फैलता है और कमजोर पशु जल्दी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए दूध उत्पादन करने वाले पशुओं के पोषण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

थनैला जैसी बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

गंदगी और संक्रमण के कारण पशुओं में थनैला जैसी गंभीर बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। यह बीमारी सीधे दूध उत्पादन को प्रभावित करती है और दूध की गुणवत्ता को भी खराब कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पशुशाला और दुग्ध दोहन स्थल की नियमित सफाई संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पशुशाला की सफाई क्यों है जरूरी

पशु वैज्ञानिकों के अनुसार, पशुशाला का फर्श साफ और सूखा होना चाहिए। अधिकांश संक्रमण और बीमारियां गंदगी से ही फैलती हैं। यदि पशु गंदे फर्श पर बैठते हैं तो उनके शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

गंदगी से बढ़ते हैं कई स्वास्थ्य जोखिम

गंदगी के कारण मच्छर और मक्खियां तेजी से पनपती हैं, जिससे पशुओं में विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा किलनी और अन्य परजीवी भी पशुओं के शरीर से चिपक सकते हैं। गंदे वातावरण का असर पशुओं के चारे और पानी पर भी पड़ता है, जिससे पेट संबंधी समस्याएं और संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। दूध दुहने के दौरान साफ-सफाई नहीं होने पर दूध के दूषित होने का जोखिम भी बना रहता है।

बरसात में संतुलित खुराक देना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में पशुओं को केवल हरा चारा ही नहीं, बल्कि उसके साथ सूखा चारा भी देना चाहिए। अधिक मात्रा में हरा चारा खिलाने से अफरा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

खनिज तत्वों की पूर्ति पर दें ध्यान

पशुओं की दैनिक खुराक में कैल्शियम, फास्फोरस और अन्य खनिज तत्वों को शामिल करना चाहिए। यदि संभव हो तो साइलेज भी खिलाया जा सकता है, लेकिन उसमें अधिक नमी नहीं होनी चाहिए। नमी वाला चारा जल्दी खराब होकर पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

स्वच्छ पानी से ही रहेगा पशु स्वस्थ

बरसात के मौसम में पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी पिलाना चाहिए। पानी पिलाने वाले बर्तन और टंकियां भी नियमित रूप से साफ की जानी चाहिए।

दूषित पानी बन सकता है बीमारी का कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी पीने से पशुओं में पेट संबंधी संक्रमण और कीड़ों की समस्या हो सकती है। पानी की टंकी की नियमित सफाई और आवश्यकतानुसार चूने का उपयोग पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकता है।

समय पर टीकाकरण से होगा बेहतर बचाव

पशु चिकित्सकों के अनुसार, खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए हर छह महीने में टीकाकरण कराना चाहिए। वहीं गलघोंटू जैसी बीमारियों से सुरक्षा के लिए वार्षिक टीका लगवाना जरूरी है।

बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत लें सलाह

यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना योग्य सलाह के उपचार कराने से पशु की स्थिति और गंभीर हो सकती है। समय पर जांच और उपचार से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

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