कृषि समाचार

दलहन उत्पादन बढ़ने के आसार, कीमतें स्थिर रहने की संभावना

Pulse production in india

नई दिल्ली: देश में इस साल दलहन उत्पादन को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त बफर स्टॉक, बेहतर बुवाई और अनुकूल मौसम के चलते आने वाले महीनों में दालों की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल दालों की कीमतों में किसी बड़े उछाल की आशंका नहीं है, क्योंकि रबी सीजन में दलहन की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ा है और सरकारी स्तर पर भी पर्याप्त भंडार मौजूद है.

पर्याप्त बफर स्टॉक से बाजार को सहारा

उपभोक्ता मामलों के विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार के पास इस समय लगभग 2 लाख टन दालों का बफर स्टॉक उपलब्ध है. यह स्टॉक जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करेगा. इसके साथ ही खरीफ सीजन की फसल की अच्छी कटाई और हाल के महीनों में हुए आयात के चलते निजी व्यापारियों के पास भी पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे आपूर्ति की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है.

दलहन फसलों की बुवाई में 14.5 फीसदी की बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस रबी सीजन में चना, मसूर और उड़द जैसी प्रमुख दलहन फसलों की बुवाई में पिछले वर्ष की तुलना में 14.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. दलहन की कुल बुवाई का रकबा बढ़कर 13.4 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. अधिकारियों का कहना है कि रबी की बुवाई बढ़ने और मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे बाजार में दालों की उपलब्धता बनी रहेगी.

दालों के रेट में अब नहीं दिख रही तेजी

अधिकारियों के मुताबिक, अगस्त 2024 में दालों की कीमतों में सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली थी. इसके बाद फरवरी 2025 से दालों की कीमतों में गिरावट का रुझान शुरू हुआ, जो फिलहाल भी जारी है. सरकार की ओर से समय पर किए गए आयात और घरेलू आपूर्ति बढ़ने के कारण दालों के दाम काबू में बने हुए हैं. आने वाले महीनों में भी कीमतों में तेज उछाल की संभावना से इनकार किया गया है.

पांच साल के लिए बढ़ाया गया आयात समझौता

देश में दालों की आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने म्यांमार, मोज़ाम्बिक और मलावी से शुल्क मुक्त दालों के आयात के लिए किए गए समझौता ज्ञापनों (MoU) को अप्रैल 2026 से अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है. इससे घरेलू बाजार में अरहर और उड़द दाल की उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी.

इन देशों से होता है इतना दालों का आयात

मौजूदा समझौतों के तहत भारत हर साल मोज़ाम्बिक से 0.2 लाख टन, म्यांमार से 0.1 लाख टन और मलावी से 50,000 टन अरहर दाल का आयात करता है. इसके अलावा भारत म्यांमार से प्रतिवर्ष 0.25 लाख टन उड़द दाल आयात करने के लिए भी प्रतिबद्ध है. गौरतलब है कि 2016 में जब अरहर दाल की खुदरा कीमतें 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं, तब मोज़ाम्बिक के साथ आयात समझौता किया गया था, जिसे 2021 में आगे बढ़ाया गया था.

दालों में आत्मनिर्भरता के लिए बड़ा बजट

सरकार ने दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी तैयार की है. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, देश में आय और जीवन स्तर बढ़ने के साथ दालों की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन अभी मांग के अनुरूप नहीं है. इसी को देखते हुए छह वर्षीय मिशन के तहत सरकार ने 2024-25 में 25.68 लाख टन से बढ़ाकर 2030-31 फसल वर्ष तक दालों का उत्पादन 35 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए कुल 11,440 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.

किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत की उम्मीद

दलहन की बढ़ती बुवाई, अनुकूल मौसम, पर्याप्त बफर स्टॉक और आयात व्यवस्था के चलते आने वाले महीनों में दालों की कीमतें स्थिर रहने की संभावना जताई जा रही है. इससे एक ओर किसानों को बेहतर उत्पादन का लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भी दालों के मोर्चे पर महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है.

ये भी पढ़ें: गेहूं के भाव में मजबूती, MSP से काफी ऊपर कारोबार

Related posts

Leave a Comment