लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। गन्ना विकास विभाग और इफको के संयुक्त प्रयास से आयोजित वर्चुअल कार्यशाला में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने और स्मार्ट उर्वरकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
मंजूर खाद और कीटनाशकों के उपयोग पर सख्ती
कार्यशाला में चीनी मिलों को निर्देश दिए गए कि किसानों तक केवल स्वीकृत और अनुशंसित उर्वरक व कीटनाशक ही पहुंचाए जाएं। विभाग ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में घटिया या अस्वीकृत उत्पाद किसानों को उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, क्योंकि इससे फसल और मिट्टी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
नैनो उर्वरक और आधुनिक तकनीक पर जोर
विशेषज्ञों ने नैनो आधारित उर्वरकों और जैविक उत्पादों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी। इनके संतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, पौधों की बेहतर वृद्धि और उर्वरक दक्षता में बढ़ोतरी संभव है। इससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
हर क्षेत्र में बनेंगे प्रदर्शन प्लॉट
प्रदेश के प्रत्येक चीनी मिल क्षेत्र में स्मार्ट उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शन प्लॉट स्थापित किए जाएंगे। इन प्लॉट्स के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों के परिणाम सीधे देखने और समझने का अवसर मिलेगा।
किसानों को अनुदान पर मिलेंगे स्प्रेयर
सरकार ने किसानों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए अनुदान योजना भी शुरू की है। इसके तहत हजारों पावर और बैटरी स्प्रेयर किसानों को रियायती दर पर दिए जाएंगे, जिससे छिड़काव प्रक्रिया अधिक प्रभावी और आसान बन सकेगी।
पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस
कार्यशाला में वृक्षारोपण अभियान और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। किसानों और अधिकारियों को अधिक से अधिक पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि खेती के साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे। यह पहल गन्ना खेती को आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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