कृषि समाचार

भारतीय कृषि में 2025 बना रिकॉर्ड उत्पादन का साल

Indian Agriculture farmers

नई दिल्ली: साल 2025 में भारतीय कृषि क्षेत्र ने उत्पादन के मोर्चे पर मजबूती दिखाई है. बेहतर मॉनसून, खरीफ फसलों के शानदार प्रदर्शन और रबी बुवाई में बढ़ोतरी के चलते चालू फसल वर्ष में खाद्यान्न उत्पादन के नए रिकॉर्ड बनने की संभावना जताई जा रही है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 2025-26 फसल वर्ष में खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्ष के 357.73 मिलियन टन के स्तर को पार कर सकता है. हालांकि, उत्पादन में मजबूती के बावजूद किसानों की आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और निर्यात से जुड़े मुद्दे अब भी चुनौतियां बने हुए हैं.

खरीफ उत्पादन ने दिखाई मजबूती

कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष खरीफ फसलों का प्रदर्शन कुल मिलाकर सकारात्मक रहा है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से बेहतर रहा, जिससे धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिली. कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 173.33 मिलियन टन रहने का अनुमान है. इसमें धान का उत्पादन 124.5 मिलियन टन से अधिक और मक्का का उत्पादन करीब 28.3 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. इससे देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

रबी सीजन में बढ़ा खेती का रकबा

रबी सीजन में भी किसानों का रुझान खेती की ओर मजबूत बना हुआ है. 19 दिसंबर तक रबी फसलों की बुवाई 659.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में अधिक है. खास तौर पर गेहूं और दालों की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है. हालांकि, सितंबर में कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश के कारण फसलों को नुकसान भी हुआ, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन की संभावनाएं बेहतर बनी हुई हैं. इसके बावजूद कृषि और सहायक क्षेत्रों की वृद्धि दर 2025-26 में करीब 4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया जा रहा है.

किसानों की आय और MSP को लेकर असंतोष

नीति आयोग के अनुसार, पिछले साल के ऊंचे आधार के कारण कृषि विकास दर में मामूली गिरावट देखी जा रही है. वहीं, किसानों की आय और न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर असंतोष इस साल भी सामने आया. फरवरी 2025 में पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर किसान संगठनों ने प्रदर्शन किए. किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार कानूनी MSP, कर्ज माफी और पेंशन शामिल थीं. मार्च में प्रदर्शन समाप्त जरूर हुए, लेकिन नीतिगत असहमति पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी.

GST राहत से किसानों की लागत घटी

साल 2025 की बड़ी नीतिगत पहलों में जीएसटी परिषद का फैसला अहम माना जा रहा है. परिषद ने ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई उपकरण और कुछ जैव कीटनाशकों पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी. इससे किसानों की लागत में कमी आई और कृषि मशीनरी की खरीद आसान हुई. हालांकि, रासायनिक कीटनाशकों पर जीएसटी दर में कोई बदलाव नहीं किया गया. कृषि उपकरण उद्योग का मानना है कि टैक्स कटौती से किसानों की खरीद क्षमता में सुधार हुआ है और मशीनीकरण को बढ़ावा मिला है.

निर्यात पर दबाव, फिर भी बढ़त दर्ज

वर्ष 2025 में भारतीय कृषि निर्यात को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी टैरिफ का असर झींगा, मसाले, चावल, प्रोसेस्ड फूड और डेयरी उत्पादों के निर्यात पर देखा गया. इसके बावजूद भारत ने नए बाजारों की ओर रुख कर स्थिति को संभालने की कोशिश की. अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच कृषि निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र के लिए राहत की बात है.

कृषि बजट और सरकारी योजनाएं

2025-26 के लिए कृषि मंत्रालय का बजट 1.37 लाख करोड़ रुपये रखा गया है. सरकार ने फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाया है और डीएपी खाद पर सब्सिडी में इजाफा किया है. नई योजनाओं में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और राष्ट्रीय दलहन मिशन शामिल हैं. पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक किसानों को 3.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है. इसके साथ ही सरकार ने नकली खाद और कीटनाशकों के खिलाफ सख्ती के संकेत भी दिए हैं.

आगे की चुनौतियां और नजर 2026 पर

साल के अंत में कृषि क्षेत्र के सामने जलवायु परिवर्तन, छोटे जोत आकार, भंडारण सुविधाओं की कमी और किरायेदार किसानों की समस्याएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. 2026 में किसानों और कृषि उद्योग की नजर बीज विधेयक और कीटनाशक प्रबंधन विधेयक जैसे अहम नीतिगत फैसलों पर टिकी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत सुधार और मौसम का साथ जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि और अधिक मजबूत हो सकती है.

ये भी पढ़ें: गेहूं के भाव में मजबूती, MSP से काफी ऊपर कारोबार

Related posts

Leave a Comment