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पश्चिमी यूपी में गोभी की फसल पर सुंडी का हमला, किसानों को भारी नुकसान

Cabbage in Western UP

सहारनपुर: पश्चिमी यूपी में गोभी की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस क्षेत्र में फूलगोभी और बंद गोभी (पत्ता गोभी) की खेती हजारों बीघा क्षेत्रफल में होती है। सहारनपुर से तैयार गोभी की सप्लाई कई राज्यों तक की जाती है, लेकिन अचानक मौसम में आई गर्माहट और बदलाव के चलते गोभी की फसल में सुंडी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सुंडी के प्रकोप से गोभी की चमक कम हो जाती है, वजन घटता है और मंडी में किसानों को कम दाम मिलने लगते हैं, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ता है।

मौसम परिवर्तन से बढ़ी सुंडी की समस्या

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान में अचानक बढ़ोतरी और मौसम के बदलाव से कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। गोभी की फसल में सुंडी लगने से बाहरी पत्तियां और अंदर का हिस्सा दोनों प्रभावित होते हैं। इसका असर न केवल उत्पादन पर पड़ता है, बल्कि बाजार में गोभी की गुणवत्ता भी गिर जाती है।

बिना रसायन अपनाने की सलाह

कृषि वैज्ञानिक डॉ. आई.के. कुशवाहा का कहना है कि किसानों को रासायनिक दवाओं के बजाय सुरक्षित और जैविक उपाय अपनाने चाहिए। सही तकनीक अपनाने से न केवल सुंडी के वयस्क कीट नष्ट होते हैं, बल्कि फसल सुरक्षित रहती है, उत्पादन बढ़ता है और मंडी में बेहतर दाम मिलते हैं।

बिना रसायन के सुंडी नियंत्रण के उपाय

डॉ. कुशवाहा के अनुसार सुंडी से बचाव के लिए किसानों को तीन प्रमुख उपाय अपनाने चाहिए। पहला फेरोमेन ट्रैप, दूसरा लाइट ट्रैप और तीसरा ट्राइकोडर्मा कार्ड। एक बीघा खेत में एक फेरोमेन ट्रैप लगाया जाता है, जबकि दो से तीन बीघा खेत में एक लाइट ट्रैप पर्याप्त होता है। ट्राइकोडर्मा कार्ड एक एकड़ में एक लगाया जा सकता है और यदि सुंडी का प्रकोप अधिक हो तो दो कार्ड लगाने की सलाह दी जाती है।

कैसे काम करते हैं ये उपाय

फेरोमेन ट्रैप सुंडी के वयस्क कीटों को अपनी ओर आकर्षित कर उन्हें खत्म कर देता है, जिससे उनकी जीवन चक्र टूट जाती है। लाइट ट्रैप का इस्तेमाल रात में किया जाता है, इसमें रोशनी से आकर्षित होकर उड़ने वाले कीट पास रखे पानी में गिरकर नष्ट हो जाते हैं। ट्राइकोडर्मा कार्ड को गोभी की पत्तियों के नीचे लगाया जाता है। इससे निकलने वाला मित्र कीट खेत में फैलकर सुंडी के अंडों में अपने अंडे देता है, जिससे सुंडी के बच्चे खत्म हो जाते हैं और फसल सुरक्षित रहती है।

उत्पादन और आमदनी दोनों को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि इन जैविक और गैर-रासायनिक उपायों को अपनाने से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहता है, बल्कि किसानों की लागत भी घटती है। इससे गोभी की गुणवत्ता बनी रहती है, उत्पादन बढ़ता है और किसानों को मंडी में उनकी फसल के अच्छे दाम मिलते हैं।

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