लखनऊ: अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने और तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार के निर्देश पर कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) और सहकारी समितियों को 10 टन क्षमता की ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट स्थापित करने पर प्रोजेक्ट की लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम 9.90 लाख रुपये तक का अनुदान देने की घोषणा की है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए 14 से 31 अगस्त 2025 तक agridarshan.up.gov.in या upfposhaktiportal.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा, जिसके लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा।
कृषि विभाग के अपर निदेशक (तिलहन/दलहन) अनिल कुमार पाठक ने बताया कि यह योजना तिलहन फसलों की कटाई के बाद तेल निष्कर्षण और पुनर्प्राप्ति की दक्षता बढ़ाने, साथ ही एफपीओ और सहकारी समितियों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत फसल के बाद तिलहन संग्रह, तेल निष्कर्षण और पुनर्प्राप्ति को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी उद्योगों, एफपीओ और सहकारी समितियों की क्षमता में वृद्धि की जाएगी।
योजना के लिए पात्र एफपीओ वे होंगे जो कंपनी अधिनियम या सहकारिता अधिनियम के तहत पंजीकृत हों, कम से कम तीन वर्ष से संचालन कर रहे हों, जिनके पास 200 से अधिक किसान सदस्य हों, पिछले तीन वर्षों में जिनका औसत वार्षिक कारोबार 9 लाख रुपये से अधिक रहा हो और जिनमें किसानों द्वारा कम से कम 3 लाख रुपये की इक्विटी निवेशित हो। इसके अलावा शक्ति पोर्टल पर पंजीकरण भी अनिवार्य होगा। इसी प्रकार सहकारी समितियों को भी सहकारिता अधिनियम के तहत पंजीकृत होना होगा, कृषि क्षेत्र में तिलहन उत्पादन, विक्रय या प्रसंस्करण का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए और उनके पास भी 200 से अधिक किसान सदस्य तथा औसत वार्षिक कारोबार 9 लाख रुपये से अधिक होना चाहिए।
अधिक आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में जनपद स्तरीय गठित कमेटी के समक्ष ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल प्रदेश में तिलहन प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि किसानों को स्थानीय स्तर पर ही अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
