नई दिल्ली: देश के मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने तथा मत्स्य उत्पादन को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) मील का पत्थर साबित हो रही है। वर्ष 2020 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाना, मत्स्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को समृद्ध बनाना है।
क्या है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य है देश के मत्स्य क्षेत्र का सतत और समग्र विकास। यह योजना 5 वर्षों की अवधि (2020-21 से 2024-25) तक लागू की गई है, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में कुल 20,050 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह अब तक मत्स्य क्षेत्र में किया गया सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। इस योजना का मुख्य फोकस “मछली उत्पादन को बढ़ाकर निर्यात में वृद्धि, मछुआरों की आय में सुधार, और मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार” करना है। योजना के तहत समुद्री, अंतर्देशीय तथा तालाबों में मछली पालन करने वालों को सहायता दी जाती है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य
वर्ष 2024-25 तक देश में मछली उत्पादन को 22 मिलियन टन तक पहुंचाना
मत्स्य निर्यात को बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना
55 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार देना
मछली के बाद-प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना
मछुआरों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता प्रदान करना
मत्स्य पालन को ‘ब्लू इकोनॉमी’ का सशक्त हिस्सा बनाना
किन्हें मिलता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ छोटे, सीमांत, पारंपरिक और व्यावसायिक मछुआरों, मत्स्य पालकों, SHGs, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र को मिलता है। सरकार इन हितधारकों को फिश हैचरी, फिश फीड मिल, बायोफ्लॉक यूनिट्स, कोल्ड चेन, ट्रांसपोर्टेशन व मार्केटिंग जैसी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता देती है।
बायोफ्लॉक और RAS जैसी तकनीकों को बढ़ावा
PMMSY के तहत बायोफ्लॉक तकनीक और Recirculatory Aquaculture System (RAS) जैसे वैज्ञानिक तरीकों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे सीमित स्थानों पर अधिक उत्पादन संभव हो रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों में कम जगह में मछली पालन करने के इच्छुक युवाओं को इसका विशेष लाभ मिल रहा है।
महिलाओं और युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
यह योजना महिलाओं और युवाओं को मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही है। सरकार द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम, ऋण सुविधा और सब्सिडी दी जा रही है जिससे महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) और युवा उद्यमी मत्स्य व्यवसाय को एक सफल स्टार्टअप में बदल पा रहे हैं।
न्यूनतम लागत, अधिक आय
PMMSY के अंतर्गत सब्सिडी और ऋण सहायता के कारण मछली पालन व्यवसाय की लागत कम हो गई है और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं। जिससे छोटे मछुआरों की आय में दो से तीन गुना तक वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही, योजना ने मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला को भी सशक्त बनाया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना न केवल मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि इससे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका, आय और सामाजिक स्थिति में भी सुधार ला रही है। यह योजना भारतीय मत्स्य उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बना रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया संबल दे रही है। मत्स्य पालन में रुचि रखने वाले इच्छुक व्यक्ति राज्य के मत्स्य विभाग या मत्स्य विकास एजेंसियों के कार्यालय से संपर्क कर इस योजना के तहत पंजीकरण कर सकते हैं और सरकारी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
